
बिहार के वैशाली में मंगलवार को गंगा नदी में नाव पलट गई। हादसे में 13 बच्चों की मौत हो गई। हादसे के बाद भास्कर की टीम ने ग्राउंड पर जाकर इन्वेस्टिगेशन की।
हमारी पड़ताल में सामने आया कि 3 साल पुरानी नाव में 20 से ज्यादा छेद थे। नाव के एक ओर 1 फीट की लंबी दरार थी।
इस नाव की क्षमता 5 लोगों की थी, लेकिन इसमें 25 बच्चे सवार थे। दरार और छेद की वजह से नाव के अंदर 5 मिनट में पानी भर गया और वो पलट गई।
15 फीट गहरे पानी में नाव के नीचे सभी बच्चे दब गए। 10 मिनट के अंदर 13 बच्चों की मौत हो गई।
वैशाली नाव हादसे पर पढ़िए और देखिए भास्कर की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट…

वैशाली जिले के रामपुर श्यामचंद गांव में गंगा नदी में नाव पलटने से 13 बच्चों की मौत हो गई है। घटना मंगलवार की रात 7.30 बजे की है। सभी एक ही नाव पर सवार होकर तेरहवीं का भोज खाने जा रहे थे।
भास्कर की इन्वेस्टिगेटिव टीम घटना के तुरंत बाद मौके पर पहुंची और हादसे पर पूरी पड़ताल की। रिपोर्टर ने नदी में उतरकर नाव की अंदर और बाहर से गहराई से पड़ताल की, तो नाव में छोटे-बडे 20 से ज्यादा छेद मिले। इन छेदों से लगातार पानी नाव के अंदर भर रहा था।
एक जगह 1 फीट तक नाव की लकड़ी टूटी थी। जिससे सबसे ज्यादा पानी अंदर घुस रहा था।
जिस नाव पर 25 लोग सवार थे उस नाव की डाइमेंशन 15 फीट लंबी, 6 फीट चौड़ी और 2 फीट गहरी थी। नाव की क्षमता सिर्फ 5-6 लोगों के बैठने की थी, लेकिन उसमें 25 लोग सवार थे।
हमने घटना की मुख्य वजह खंगालना शुरू किया। इन्वेस्टिगेशन के दौरान पाया कि नाव 3 साल पुरानी थी। रिपोर्टर खुद नाव पर बैठे तो पाया कि नाव की छेद को भरने के लिए अंदर से मिट्टी की लेप लगाई गई है। जिस लेप से पानी का रिसाव हो रहा था।
रिपोर्टर ने जब मिट्टी को हटाया तो देखा कि नाव में 20 से ज्यादा जगहों पर छोटे-बड़े छेद हैं, जिससे लगातार पानी का रिसाव हो रहा है।
नाव चलाने वालों ने इन छेदों को मिट्टी की लेप लगाकर बंद किया था। पानी के रिसने से मिट्टी की लेप हट गई थी और नाव में पानी भर गया।

हादसे के बाद हम जब रिपोर्टर जब नाव पर थे तब नाव पर 2 लोग बैठे थे। उस समय नाव का टूटा हिस्सा पानी में डूब गया और नाव में पानी भरने लगा। इस घटना ने भी साफ कर दिया कि नाव की कंडीशन काफी ज्यादा खराब थी। नाव में क्षमता से ज्यााद लोग बैठाए गए। छेद होने की वजह से पानी भरा और वो डूब गई।
रिपोर्टर ने मौके पर मौजूद लोगों से भी बात की। उन्होंने बताया कि ये नाव सरकार की तरफ से दी गई थी। गांव के ही मंगल राय ने बताया कि ये इलाका गंगा नदी का है। ये गहरा है जिसमें पानी भर जाता है और ये सीधे गंगा नदी में मिलता है।
मंगल राय ने बताया कि ईंट भट्ठे के लिए मिट्टी की खुदाई की गई, जिससे 15 फीट गहरा गड्ढा हो गया।
- रिपोर्टर- ये नाव किसकी है?
- मंगल राय- गांव के मुखिया ने उस पार रहने वालों के लिए दी थी। वह लोग उसी नाव से आते-जाते हैं।
- रिपोर्टर- उस पार किसका घर है?
- मंगल राय- उस पार दीनदयाल राय, रामदयाल राय और शिवदयाल राय का घर है। खास इन्हीं लोगों के लिए नाव दी गई थी। नाव टूटी थी। इसके बाद भी उसे ठीक नहीं कराया गया था। 20 से ज्यादा लोग बैठ गए और नाव में पानी भरने लगा, जिससे नाव पलट गई।
- रिपोर्टर- इसकी गहराई कितनी होगी?
- मंगल राय- पहले ज्यादा गहरा नहीं था, लेकिन गांव के पूर्व मुखिया गगन राय का ईंट भट्ठा है। वह अपनी चिमनी के लिए इसमें से JCB से मिट्टी की खुदाई करवाता है। जिसकी वजह से वहां की गहराई 15 फीट से अधिक हो गई है। अगर JCB से खुदाई नहीं हुई होती तो नाव पलटने के बाद भी ये बच्चे नहीं मरते।
- रिपोर्टर- घटना के समय क्या-क्या हुआ?
- मंगल राय- बिंदेश्वर राय उस पार श्राद्ध का खाना खाने जा रहे थे। वह अपने बच्चों को भी ले जा रहे थे। जब किनारे पहुंचे तो वहां और भी बच्चे आ गए। सभी को उस पार जाना था। सभी को वह बैठाते चले गए।अगर वहां मिट्टी की कटाई नहीं की गई होती तो किसी की मौत नहीं होती।

आगे रिपोर्टर की मुलाकात गांव के चंदेश्वर राय से हुई। चंदेश्वर राय ने बातचीत में बताया कि ये दाब का इलाका लोगों की अपनी जमीन है। इसमें ईंट भट्ठे के लिए मिट्टी की खुदाई होती है। बाहर की चिमनी वाले भी यहां से मिट्टी की कटाई करते हैं।
यहां एक साल पहले भी एक व्यक्ति की डूबने से मौत हो गई थी। एक व्यक्ति पानी के किनारे गया। उसे लगा कि यहां पानी कम ही है, लेकिन वह काफी गहरा था, जिसमें वह डूब गया और मौत हो गई।

रिपोर्टर की मुलाकात मौके पर मौजूद चंदन से हुई। चंदन ने बातचीत में बताया कि छोटे-छोटे बच्चे थे, वह नाव से दूसरे पार जाने के लिए जिद्द कर रहे थे। नाव से ही जाने की बात पर अड़े थे। जबकि नाव नीचे से भी लीक कर रही थी। उसमे बच्चों के चढ़ने के पहले ही 3-4 बाल्टी पानी भरा था।
बच्चों को कितना भी मना किया जा रहा था, बच्चे नहीं मान रहे थे और सभी एक साथ ही नाव पर बैठने के लिए जिद्द करने लगे। बच्चे जैसे ही नाव पर चढ़े, नाव पर दबाव बढ़ गया।
नाव पर लोड बढ़ते ही नाव के बड़े वाले छेद से ज्यादा मात्रा में पानी भरने लगा। महज 20-30 फीट ही दूर गए थे, तब तक नाव में पानी भऱ गया और नाव पलट गई।

अब जानिए हादसे की कहानी
बिहार के वैशाली जिले अंतर्गत राघोपुर दियारा क्षेत्र में मंगलवार रात नाव पलट गई, जिसमें 13 बच्चों की मौत हो गई। स्थानीय लोगों और बचाए गए बच्चों के बयानों के अनुसार, यह हादसा नाव में छेद होने, ओवरलोडिंग और उसमें तेज़ी से पानी भरने के कारण हुआ।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक नाव पर लगभग 25 लोग सवार थे। नाव पलटने के बाद मची अफरा-तफरी के बीच कुछ लोग पानी में कूद गए, जबकि कई लोग नाव के नीचे दब गए। अंधेरे के कारण लोगों को बचाने में ज्यादा परेशानी हुई।
स्थानीय लोगों ने मोटी लकड़ी में रस्सी बांध कर या खाट के सहारे शवों को निकाला। रेस्क्यू टीम के लेट पहुंचने पर लोगों ने हंगामा किया। फिलहाल प्रशासन की ओर से राहत कार्य जारी है।
क्या होता है ढाब, जिसका जिक्र ग्रामीणों ने किया
गांव के चंदेश्वर राय ने भास्कर को बताया कि हादसा गंगा के पानी से बने ढाब में नाव के डूबने से हुआ। स्थानीय निवासियों के मुताबिक बाढ़ का पानी उतरने के बाद निचले इलाकों में पानी जमा हो जाता है। इसे स्थानीय भाषा में ‘ढाब’ कहते हैं।
ग्रामीण आने-जाने के लिए इसी पानी को नाव से पार करने पर मजबूर होते हैं, जो हादसों का सबब बनता है।










