
10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का ऐलान किया, लेकिन परमिशन नहीं मिली। अगले दिन 11 अक्टूबर को जंतर-मंतर प्रदर्शनों के लिए बंद कर दिया गया। भीड़ जुटने से पहले अलग-अलग जगहों से CJP लीडर्स समेत तमाम लोग डिटेन कर लिए गए। ये रणनीति आंदोलन रोकने की नहीं, बल्कि CJP का प्रभाव खत्म करने के लिए है।
BJP सूत्रों के मुताबिक, CJP से निपटने की रणनीति शीर्ष स्तर पर बनी। मैदान में कमान BJP अध्यक्ष नितिन नवीन संभाल रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि CJP की घेराबंदी के लिए 150 से ज्यादा सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स, यूट्यूबर्स और सीनियर जर्नलिस्ट मैदान में हैं। वकीलों की टीम कानूनी घेराबंदी कर रही है। अगले 2-3 महीनों में CJP की कथित विदेशी फंडिंग एक्सपोज करने की भी तैयारी है।

10 अक्टूबर को दिल्ली एयरपोर्ट से डिटेन किए गए CJP लीडर अभिजीत दीपके को 11 अक्टूबर को रिहा किया गया।
सरकार की प्लानिंग औैर नितिन नवीन का एक्शन
BJP सूत्रों के मुताबिक, जुलाई में CJP के प्रोटेस्ट का असर देखने के बाद से अब तक टॉप लीडरशिप ने 4 काम किए।
1. कनेक्टिविटी के लिहाज से आसान और सबसे मशहूर धरनास्थल जंतर-मंतर को सूची से बाहर करने का फैसला। इस पर मुहर 29 सितंबर को ही लग गई थी, लेकिन ये लोगों के बीच 11 अक्टूबर को आया।
2. केंद्र सरकार ने 29 सितंबर को राज्यों के DGP को एक लेटर भेजा। इसमें कहा गया था कि उनके यहां से 10 अक्टूबर को आने वाले प्रदर्शनकारियों को वहीं रोका जाए।
3. यूट्यूबर और इन्फ्लुएंसर्स के सभी अकाउंट्स पर नजर रखने के लिए पुलिस की साइबर सेल को एक्टिव किया, ताकि CJP समर्थित पोस्ट होने पर उसकी पड़ताल कर धरपकड़ की जाए।
ये सभी निर्देश सिर्फ 10 अक्टूबर तक के लिए नहीं थे। इन पर पुलिस आगे भी एक्शन लेती रहेगी।
सबसे पहले समझिए… धरनास्थल जंतर-मंतर को किसने और कैसे खत्म किया?
सूत्र ने बताया कि जुलाई में CJP का प्रोटेस्ट देखने के बाद अगस्त के पहले हफ्ते में मीटिंग हुई। इसमें नितिन नवीन और बीएल संतोष समेत 5-7 लोग शामिल थे। कुछ पुलिस अफसरों से इनपुट लेने के बाद इसी मीटिंग में जंतर-मंतर को धरनास्थल की सूची से हटाने का फैसला लिया गया।
सोर्स कहते हैं, ‘इससे दो फायदे होंगे। पहला, बाहर आने वालों को रोकने का वक्त मिल जाएगा। दूसरा, प्रदर्शन के लिए तय तीनों नई जगह रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान, जंतर-मंतर की तरह कनेक्टिविटी वाला नहीं हैं।‘


दूसरी मीटिंग: 29 सितंबर CJP की बढ़ती ताकत पर नजर, आकलन कर रिपोर्ट बनाने के निर्देश
दिल्ली BJP दफ्तर में हमारे सूत्र ने बताया, दिल्ली के हेडक्वार्टर में सुबह 10 बजे से शाम करीब 6.30 तक बैठक हुई। इसमें पार्टी के सभी नए प्रभारी और सह-प्रभारी शामिल हुए।
मीटिंग का एजेंडा संगठनात्मक गतिविधि था, लेकिन कोर एजेंडा CJP की बढ़ती ताकत और उसके आंदोलन में आने वाली भीड़ को बढ़ने से रोकना था। प्रभारियों को निर्देश दिया गया कि वो अपने राज्यों में CJP के बढ़ते प्रभाव को टटोलें और इस पर रिपोर्ट बनाएं।
सूत्र के मुताबिक, प्रभारियों से कहा गया कि वो युवाओं के बीच जाकर समझें कि युवा CJP के साथ अस्थायी तौर पर हैं या उसे लेकर गंभीर हैं। BJP शासित राज्यों में प्रभारियों को पुलिस के साथ मिलकर काम करने का निर्देश दिया गया। बैठक में ये भी बताया गया कि सभी राज्यों की लोकल इंटेलिजेंस यूनिट CJP और उसके प्रभाव का आकलन कर रही है।

10 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को मांग लेकर निकले प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेडिंग कर रोका।
तीसरी मीटिंग: 9 अक्टूबर प्रोटेस्ट पर सख्ती, वाटर कैनन-टियर गैस न चलाने का फैसला
नितिन नवीन ने BJP दफ्तर में राष्ट्रीय महासचिवों के साथ 3 घंटे से ज्यादा की बैठक की। एजेंडा संगठन के मुद्दों, युवा आउटरीच और SIR विरोध प्रदर्शनों का फीडबैक लेना था। बैठक के केंद्र में CJP प्रोटेस्ट का मुद्दा और उससे निपटने की रणनीति थी। सभी महासचिव अपने राज्यों के प्रभारियों से CJP को लेकर मिले फीडबैक के साथ बैठक में शामिल हुए।
सूत्र के मुताबिक, इसके बाद बैठक में CJP आंदोलन पर सख्ती करने, प्रोटेस्टर्स और लीडर्स को डिटेन करने को लेकर सहमति बनी। हालांकि, इस बार वाटर कैनन और टियर गन नहीं चलाने की बात भी तय हुई।
इसी मीटिंग में कहा गया कि छोटे से लेकर बड़े कार्यकर्ता तक सभी SIR के सपोर्ट में सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट करेंगे। अगले 30 दिनों तक ये मैसेज किए जाएंगे। वॉट्सएप ग्रुप के जरिए ये मैसेज उसी दिन पार्टी कार्यकर्ताओं को भेजा गया।

चौथी मीटिंग: 14 अक्टूबर नितिन नवीन, बीएल संतोष और महासचिवों की बैठक हुई। इसमें सबसे बड़ा मुद्दा 10 अक्टूबर को हुए CJP प्रोटेस्ट और उसके असर की जुलाई वाले प्रोटेस्ट से तुलना करना था। इसी बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। पार्टी ने तैयारी को 6 हिस्सों में बांटा:
1. CJP लीडर्स और नामी प्रदर्शनकारियों को घेरना: इसके लिए अब तक 150 से ज्यादा इन्फ्लुएंसर्स की लिस्ट तैयार हो चुकी है। ये इन्फ्लुएंसर्स जमीन पर भी उतर चुके हैं। ये CJP और विपक्ष दोनों के खिलाफ बयान इकट्ठे कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, 10 अक्टूबर को हुए प्रोटेस्ट में भी इसका असर दिखा। पिछली बार सरकार समर्थक मीडिया घिरी दिखाई दी थी। इस बार सरकार को लेकर मुखर रहे मीडिया समूहों को घेरा गया। प्रदर्शनकारियों को भी घेरा गया। हमने पूछा क्या इन्हें पैसा भी दिया जा रहा है? सोर्स ने बताया- ‘हां, ये कम उम्र के इन्फ्लुएंसर हैं, पैसा देंगे तभी तो समय देंगे।‘
2. नैरेटिव बिल्डिंग: इसके लिए सीनियर पत्रकारों की लिस्ट बन रही है। इस पर काम शुरू हो गया है। इनका काम CJP-विपक्ष के खिलाफ माहौल बनाना और सीरियस नैरेटिव तैयार करना है। इनके लिए रिसर्च का काम BJP की रिसर्च विंग और IT सेल कर रही है।
3. BJP की क्रिएटिव सेल विपक्ष और CJP के मीम्स तैयार कर रही है।
4. वकीलों का एक ग्रुप तैयार किया गया है। ये उन देशों की जानकारी इकट्ठा करेंगे कि जहां सरकार के खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए। फिर उन्हें साबित न करने पर गंभीर एक्शन हुए। ये सरकार के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर कानूनी तौर पर सवाल-जवाब करेंगे।
ये वकील विरोधी पक्ष को अदालतों के चक्कर में उलझाने का काम शुरू कर चुके हैं। सूत्र के मुताबिक, राहुल गांधी की याचिका इसी का नतीजा है। याचिका में 14 कमियों का प्रचार भी तेजी से किया जा रहा है। ये राहुल गांधी को एक बार फिर नॉन-सीरियस लीडर के तौर पर साबित करने का प्लांड एजेंडा है। विपक्ष या CJP जो साबित करना चाहती है, उसके सबूत वो कभी नहीं जुटा पाएगी।
5. सोर्स के मुताबिक, आने वाले 2-3 महीने के अंदर CJP को विदेशी फंडिंग पर एक्सपोज करने की तैयारी है। जुलाई के बाद से ही इसका डेटा तैयार किया जा रहा है। हमने पूछा क्या ऐसे कोई डाक्यूमेंट्स मिले हैं?
जवाब मिला- ‘इस पर काम हो रहा है। कुछ डेटा तो मिला है, लेकिन वो क्या है, ये ऊपर के लोग ही जानते हैं। इसे लेकर काफी गोपनीयता बरती जा रही है।’
6. कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े प्रदर्शनकारियों पर लंबी कार्रवाई की तैयारी है। ये कानून के दायरे में रहते हुए की जाएगी। इनसे जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप भी जल्द सामने आने लगेंगे।
CJP के आंदोलन से निपटने के लिए सरकार और पार्टी की रणनीति पर हमने BJP का पक्ष जानने की कोशिश की। हालांकि, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी बात करने को तैयार नहीं हुए। उनका कहना है कि ये सरकार ही तय करेगी। इस पर कुछ भी कहना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।








