
सोनिया ने पोस्ट में अपनी आने वाली किताब Belonging: A Journey of Love के बारे में जानकारी दी।
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने गुरुवार को पहली बार अपना इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया। उन्होंने अपनी पहली पोस्ट में आने वाली किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ का वीडियो शेयर किया। यह किताब 10 नवंबर को प्रकाशित होगी।
सोनिया ने पहली पोस्ट गुरुवार सुबह करीब 9 बजे की थी। 12 बजे तक 59 हजार लोगों ने इसे लाइक किया। 13 हजार लोग फॉलोअर्स हैं। वहीं, सोनिया गांधी अपने अकाउंट से राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और इंडियन नेशनल कांग्रेस को फॉलो कर रही हैं।
सोनिया ने पोस्ट में लिखा कि नमस्कार, मैं अपनी किताब आप सभी के साथ साझा करके खुश हूं। यह प्यार, कर्तव्य, अपनों को खोने और अपनेपन की जगह तलाशने की कहानी है। मैं इसे आप सबके साथ साझा करने के लिए उत्सुक हूं।
पोस्ट किए गए वीडियो में 2 तस्वीरें

किताब को लेकर आसपास मौजूद लोगों ने सोनिया को बधाई दी।

सोनिया ने किताब खोलकर कहा कि इसमें प्रियंका की कई तस्वीरें हैं।

प्रियंका गांधी ने मां सोनिया गांधी को मिठाई खिलाकर बधाई दी।
किताब में कैंब्रिज में राजीव गांधी से मुलाकात का जिक्र किया
किताब में सोनिया अपने राजनीति में सफर और 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के फैसले से जुड़े अनुभव बताएंगी।
किताब में सोनिया ने इटली में बिताए बचपन से लेकर कैंब्रिज में राजीव गांधी से मुलाकात तक का जिक्र किया है। इसमें नेहरू-गांधी परिवार में शादी और परिवार में हुई हत्याओं के बाद बदली जिंदगी के बारे में लिखा है।

सोनिया ने लिखा- यह किताब परिवार की इंसानियत को समर्पित
सोनिया ने कहा कि उनके परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन उनके इरादों, काम और मानवीय पहलुओं को उस तरह नहीं समझा गया। कई मायनों में यह किताब उनकी इंसानियत को समर्पित है। उनके मुताबिक, किताब उनके जीवन के साथ-साथ भारत में करीब छह दशकों के दौरान हुए सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को देखने का एक अलग नजरिया भी देती है।
जब मैंने राजनीति से कुछ दूरी बनाकर पीछे मुड़कर अपने जीवन को देखा, तो मुझे अपनी कहानी में प्यार और वफादारी का एक धागा साफ नजर आया। यह धागा इटली के एक छोटे शहर में बिताए साधारण बचपन से शुरू होकर भारत में राजीव गांधी की पत्नी और इंदिरा गांधी की बहू के रूप में बिताए तक जाता है।

कैम्ब्रिज में पढ़ाई के दौरान राजीव गांधी से हुई थी मुलाकात
- सोनिया गांधी का जन्म 9 दिसंबर 1946 को इटली के लुसियाना में हुआ था। उनका पूरा नाम अन्टोनिया एड्विज अल्बीना मैनो है। 1965 में कैंब्रिज में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई।
- 1968 में हिन्दू धर्म के रीति-रिवाजों अनुसार दोनों की शादी हुई। शादी के बाद सोनिया भारत आ गईं और इंदिरा गांधी के साथ रहने लगीं। 1970 में राहुल और 1972 में प्रियंका गांधी का जन्म हुआ।
- शादी के बाद सोनिया और राजीव दोनों राजनीति से दूर रहे। राजीव पायलट थे, जबकि सोनिया परिवार संभालती थीं। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव प्रधानमंत्री बने, लेकिन सोनिया सार्वजनिक जीवन और राजनीति से दूर रहीं।
पति की हत्या के बाद भी सियासत से दूर ही रहीं

कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता लेने के बाद सोनिया ने 1998 के चुनावों में पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष सीताराम केसरी के साथ कैम्पेन में भाग लिया था। अगले साल यानी 1999 में उन्होंने पहली बार चुनाव लड़ा।
1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद भी सोनिया राजनीति से दूर रहीं। पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने। 1996 तक कांग्रेस कमजोर होने लगी और पार्टी में कई गुट बन गए। 1997 में कांग्रेस को एकजुट करने के लिए सोनिया ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ली। 62 दिन बाद 1998 में वे कांग्रेस अध्यक्ष बन गईं। सोनिया 2017 तक अध्यक्ष रहीं, जो पार्टी के इतिहास में सबसे लंबा कार्यकाल है।

2004 में PM की कुर्सी ठुकराई थी
2004 में कांग्रेस ने 14 सहयोगी दलों के साथ UPA बनाया। चुनाव के बाद लेफ्ट समेत कई दलों के समर्थन से UPA को 335 सांसदों का समर्थन मिला। सहयोगियों ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया, लेकिन उन्होंने 18 मई 2004 को पद ठुकरा दिया। इसके बाद मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।
हालांकि, NDA ने सोनिया के विदेशी नागरिक का मुद्दा उठाकर उनके पीएम बनने का विरोध किया। इसके कारण सोनिया ने पीएम पद ठुकरा दिया और मनमोहन सिंह को पीएम बनाने का प्रस्ताव रखा। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनें। हालांकि, कहा जाता है कि पर्दे के पीछे रहकर सरकार की बागडोर सोनिया के हाथों में ही थी।

सोनिया की जगह मनमोहन के पीएम बनने पर संजय बारू लिख चुके किताब
डॉ. मनमोहन सिंह के मीडिया एडवाइजर रहे संजय बारू ने ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ नाम से किताब लिखी थी, बाद में इस पर फिल्म भी बनी। इसमें सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री बनने से पीछे हटने और डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री बनने के बाद का घटनाक्रम बताया गया है।








