
गडकरी ने कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री की ओर से आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि करीब तीन महीने पहले E20 फ्यूल का काफी विरोध हुआ था, लेकिन अब यह विरोध खत्म हो गया है। उन्होंने इसे पैसे देकर चलाया गया अभियान बताया।
उनका ये बयान केंद्र सरकार के 100% एथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल के इस्तेमाल को मंजूरी देने के एक दिन बाद आया है। गडकरी ने कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री की ओर से आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही।
दरअसल, भारत में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल के इस मिश्रण (E20) का विरोध हो रहा था। दावा किया गया था कि 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिक परेशान हैं। इस फ्यूल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है, मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया है और इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं।

2026 में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 1.46 लाख किलोमीटर हो गई
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर नेशनल हाईवे की खराब हालत की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद 700 से 800 प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की। हाईवे की क्वालिटी से समझौता नहीं किया जाएगा।
- अगले दो महीने में हाईवे परियोजना शुरू होने के बाद दिल्ली से हरिद्वार का सफर 90 मिनट में पूरा हो सकेगा।
- चारधाम परियोजना का 80-85% काम पूरा हो चुका है। उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों की ओर जाने वाले यातायात में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है।
- बेहतर सड़कें धार्मिक पर्यटन बढ़ा रही हैं और रोजगार के नए अवसर पैदा कर रही हैं।
- बुनियादी ढांचे पर खर्च अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है। सरकार के मुताबिक, हर 100 रुपए के निवेश का अर्थव्यवस्था पर 325 रुपए के बराबर असर होता है।
- देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 2014 में 91,287 किलोमीटर थी, जो 2026 में बढ़कर 1.46 लाख किलोमीटर हो गई है।
100% एथेनॉल वाले ईंधन को सरकार की मंजूरी
केंद्र सरकार ने 100% एथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। हालांकि, इसे सिर्फ उन्हीं गाड़ियों में इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिन्हें कंपनी ने खासतौर पर E100 फ्यूल से चलने के लिए बनाया हो। नए नियमों से ऐसी कारों की टेस्टिंग और उन्हें चलाने की मंजूरी मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

केंद्र सरकार का गजट नोटिफिकेशन।
एथेनॉल के बारे में जानें…

देश में 2 जनरेशन एथेनॉल मौजूद, थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल पर सरकार का फोकस
फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल : फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल गन्ने के रस, मीठे चुकंदर, सड़े आलू, मीठे ज्वार और मक्का से बनाया जाता है।
सेकेंड जनरेशन एथेनॉल : सेकेंड जनरेशन एथेनॉल सेल्युलोज और लिग्नोसेल्यूलोसिक मटेरियल जैसे- चावल की भूसी, गेहूं की भूसी, कॉर्नकॉब (भुट्टा), बांस और वुडी बायोमास से बनाया जाता है।

कई देशों में एथेनॉल मिला पेट्रोल पहले से इस्तेमाल हो रहा
सरकार के मुताबिक, पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 1.4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है। इससे ऊर्जा सुरक्षा बढ़ी, प्रदूषण कम हुआ और किसानों को फायदा मिला। अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे देशों में भी एथेनॉल मिला पेट्रोल इस्तेमाल होता है।
भारत ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य पांच साल पहले ही हासिल कर लिया है। 1 अप्रैल से देशभर में E20 पेट्रोल की सप्लाई शुरू हो गई है। अब सरकार का लक्ष्य 2030 तक एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर 30% करना है।










