
बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के BRICS समिट में शामिल न होने से बांग्लादेश को नुकसान हुआ।
हसीना ने PTI को दिए इंटरव्यू में बुधवार को कहा कि रहमान के फैसले के चलते बांग्लादेश ने भारत के साथ रिश्ते सुधारने का मौका भी गंवा दिया।
12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS समिट हुई थी। भारत ने रहमान को समिट में आने का न्योता दिया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे थे।
हसीना ने कहा कि अगर उनके भारत में रहने की वजह से तारिक रहमान भारत नहीं आए, तो यह दुख की बात है। दो देशों के रिश्ते किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक मतभेदों के आधार पर तय नहीं होने चाहिए।

शेख हसीना ने 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश छोड़ा था। इसके बाद से वे भारत में ही हैं। यह फुटेज उनके हेलिकॉप्टर में बैठने से पहले की है।
हसीना बोलीं- बातचीत के रास्ते खोलना सरकार की जिम्मेदारी
हसीना ने कहा कि BRICS सिर्फ नेताओं की बैठक नहीं है। इसमें दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं शामिल होती हैं। समिट में शामिल होकर बांग्लादेश दूसरे देशों से सीख सकता था। लेकिन सरकार ने यह मौका गंवा दिया।
उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार सरकार को देश के लिए दूसरे देशों से बातचीत और आगे बढ़ने के नए रास्ते खोलने चाहिए, न कि उन्हें बंद करना चाहिए।

तारिक रहमान ढाका के पुरबाचल में अपने स्वागत में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए। तस्वीर 25 दिसंबर 2025 की है।
रहमान के पिता के भारत दौरे का जिक्र किया
हसीना ने 1979 में बांग्लादेश के तत्कालीन राष्ट्रपति और तारिक रहमान के पिता जियाउर रहमान के भारत दौरे का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस समय वह दिल्ली में रह रही थीं।
हसीना के मुताबिक, 1980 में जब जियाउर रहमान लंदन गए, तब भी वह वहीं थीं। इसके बावजूद उनकी मौजूदगी ने जियाउर रहमान के दौरे में कोई रुकावट नहीं डाली।
हसीना ने कहा कि 15 अगस्त 1975 को उनके पिता और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान समेत परिवार के कई सदस्यों की हत्या कर दी गई थी।
इसके बाद 3 नवंबर को ढाका की सेंट्रल जेल में चार बड़े नेताओं की भी हत्या हुई। हसीना ने जियाउर रहमान पर गलत तरीके से सत्ता में आने का आरोप लगाया।

बांग्लादेश के राष्ट्रपति जियाउर रहमान जनवरी 1980 में पत्नी खालिदा जिया के साथ दिल्ली पहुंचे थे। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनका स्वागत किया था।
हसीना बोलीं- बांग्लादेश गंभीर संकट से गुजर रहा
हसीना ने दावा किया कि बांग्लादेश इस समय बड़े संकट से गुजर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र कमजोर हुआ है और विरोधी दलों को अपनी बात रखने के मौके नहीं मिल रहे हैं।
- न्यायपालिका का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
- मीडिया की आजादी कम हुई है और कानून-व्यवस्था बिगड़ी है।
- अल्पसंख्यक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और कट्टरपंथी ताकतों को फिर से बढ़ने का मौका मिला है।
बांग्लादेश लौटकर लोकतंत्र बहाल करना चाहती हैं हसीना
हसीना ने बांग्लादेश लौटने की कोई तारीख नहीं बताई। लेकिन उन्होंने कहा कि वह देश लौटकर लोकतंत्र बहाल करने की लड़ाई में शामिल होना चाहती हैं।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के लोगों को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव में अपनी पसंद की सरकार चुनने का मौका मिलना चाहिए। हसीना के मुताबिक, उनकी वापसी इस दिशा में एक अहम कदम होगी।

शेख हसीना ने पांचवीं बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। तस्वीर 11 जनवरी 2024 की है।
मौत की सजा के बावजूद बांग्लादेश लौटने से डर नहीं
इंटरव्यू के दौरान हसीना ने माना कि बांग्लादेश लौटना उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है। वहां की अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि वह डरकर पीछे नहीं हटेंगी।
उन्होंने 1975 में अपने पिता शेख मुजीबुर रहमान, मां, भाइयों और परिवार के कई सदस्यों की हत्या का जिक्र किया। हसीना ने कहा कि 1981 में सैन्य शासन और धमकियों के बावजूद वह बांग्लादेश लौटी थीं। उन्होंने 21 अगस्त 2004 को हुए ग्रेनेड हमले और खुद पर हुए दूसरे हमलों का भी जिक्र किया।
हसीना ने कहा कि उन्हें जेल और राजनीतिक उत्पीड़न भी झेलना पड़ा है। उन्होंने कहा कि आज उनकी सबसे बड़ी चिंता अपनी सुरक्षा नहीं, बल्कि बांग्लादेश में न्याय व्यवस्था की स्थिति है।
उन्होंने मौत की सजा को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना सजा सुनाना न्याय नहीं है।
78 साल की शेख हसीना अगस्त 2024 में सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन के बाद सत्ता से हट गई थीं। इसके बाद वह बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गईं। तब से वह यहीं रह रही हैं।








