
इंद्रगढ़ में संत शिरोमणि रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष पर विचार-विमर्श कार्यक्रम हुआ। यह कार्यक्रम अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान, खंड इंद्रगढ़ की तरफ से पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल में आयोजित किया गया। अध्यक्षता खंड अध्यक्ष महावीर कंडारा ने की।
मुख्य वक्ता राधेश्याम वशिष्ठ ने बताया कि व्यक्ति जन्म या जाति से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से महान बनता है। उन्होंने संत रविदास के दोहे सुनाते हुए कहा कि इंसान अपने कर्मों से ही छोटा या बड़ा होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि असहायों की सेवा करना और निर्मल मन से कर्तव्य निभाना ही सच्ची भक्ति है। संत रविदास ने हमलावरों के डर के बावजूद अपने धर्म और सिद्धांतों को नहीं छोड़ा और लोगों को लगातार जागरूक करते रहे। उनके विचार आज भी सामाजिक सद्भाव के लिए काम के हैं।
मुख्य अतिथि योगेश शर्मा ने कहा कि छात्रों को सिर्फ किताबी ज्ञान तक ही नहीं रखना चाहिए। उनमें नैतिक मूल्यों, राष्ट्रभक्ति, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय भावनाओं को भी विकसित करना जरूरी है।









