
सुप्रीम कोर्ट ने बांडी, लूणी व जोजरी नदी में औद्योगिक प्रदूषण और अवैध खनन के मामले में निर्देश दिए हैं कि इन नदियों को प्रदूषित करने वाली फैक्ट्रियों को हटाया जाए। इन्हें उपयुक्त स्थानों पर स्थानांतरित (ट्रांसफर) करने का अध्ययन किया जाए। राज्य सरकार व संबंधित अधिकारियों को यह आदेश जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- नदी तंत्र को प्रभावित करने वाली समस्याएं केवल औद्योगिक इकाइयों के उल्लंघन तक सीमित नहीं हैं। इनके पीछे ट्रीटमेंट क्षमता की कमी, अवैध इंडस्ट्रियल एक्टिविटी, भूमि उपयोग में अनियमितताएं और प्रभावी निगरानी की कमी जैसी व्यापक समस्याएं भी हैं।
कोर्ट ने रेजिडेंशियल और एग्रीकल्चर जमीन पर संचालित होने वाली अवैध इंडस्ट्रियल यूनिट के पूरे नेटवर्क की जांच करने के लिए भी कहा है।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन अवैध डिस्चार्ज पॉइंट, बाईपास व्यवस्था, मैनहोल, चैंबर, पाइपलाइन और नालियों की पहचान कर हटाने की अनुमति दी जा चुकी है, उन्हें बिना देरी सील या हटाया जाए।
विस्तृत सर्वे पूरा होने का इंतजार किए बिना यह कार्रवाई करनी होगी। हर 15 दिन में इसकी एक्शन टेकन रिपोर्ट देनी होगी।

मशीनों को हटाना और जब्त करना होगा
कोर्ट ने कृषि और आवासीय भूमि पर अवैध रूप से संचालित इंडस्ट्रियल यूनिट के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। ऐसी किसी यूनिट के मिलने पर केवल उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं, बल्कि उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन, जॉब-वर्क, कच्चे माल, परिवहन और लाभार्थियों के नेटवर्क की भी जांच की जाएगी।
इन पर राजस्व व भूमि उपयोग संबंधी कार्रवाई, मशीनरी को हटाने या जब्त करने, प्रभावित भूमि के पुनर्स्थापन और कानून के अनुसार कार्रवाई करने को कहा है।
हर जिले में स्थायी निगरानी व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को प्रदूषण फैलाने वाली अवैध औद्योगिक गतिविधियों की रोकथाम के लिए स्थायी और जिला-स्तरीय तंत्र स्थापित करने को कहा है।
इसमें राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला प्रशासन, पुलिस, राजस्व, परिवहन, स्थानीय निकाय और अन्य संबंधित विभाग शामिल होंगे।
नियमित निगरानी, चिह्नित नोडल अधिकारियों और समय पर कार्रवाई की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
पर्यावरण का नुकसान करने पर वसूली होगी
राजस्थान स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को उल्लंघन की पूरी अवधि के लिए संबंधित इंडस्ट्रियल यूनिट और जिम्मेदार व्यक्तियों से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति निर्धारित करने और उसे वसूलने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। बोर्ड को यह भी बताना होगा कि कितनी राशि निर्धारित हुई, कितनी वसूल की गई और कितनी राशि अभी बकाया है।
कोर्ट ने मौजूदा कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) के विस्तार, नए CETP की स्थापना तथा इंडस्ट्रियल यूनिट्स के अपशिष्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम में अपग्रेड करने से संबंधित प्रस्तावों पर समयसीमा में निर्णय लेने को कहा है।
अवैध बजरी खनन पर भी सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने नदी तल, नदी किनारों और प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित करने वाले अवैध बजरी/रेत खनन के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
खनन क्षेत्रों, लीज, मात्रा, खनन की गहराई से जुड़ी पूरी जानकारी हाई-पावर्ड इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी को 15 अक्टूबर तक देने को कहा है।

जोजरी नदी, जिसमें प्रदूषित पानी छोड़ जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार इस प्रदूषित पानी की वजह से वन्यजीवों की संख्या कम हो गई। (फाइल फोटो)
पुलों की होगी तकनीकी जांच
कोर्ट ने लूणी, जोजरी और बांडी नदी तंत्र तथा उनकी सहायक नदियों पर बने पुलों और सड़क क्रॉसिंग की तकनीकी जांच करने को कहा है।
ऐसे ढांचों की पहचान की जाएगी, जो नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा डालते हैं या डाल सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को होगी।
जोधपुर प्रदूषण नियंत्रण और अनुसंधान फाउंडेशन की ओर से अधिवक्ता ऋषभ संचेती ने पैरवी की।









