
दिल्ली पुलिस ने आशुतोष-सौरव को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर से हिरासत में लिया था।
कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका ने हाईकोर्ट से न्यायिक हिरासत बढ़ाने के खिलाफ दायर याचिका वापस ले ली है। इससे पहले कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के आचरण और संगठन की भूमिका पर सवाल उठाए।
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया और बैरिकेड तोड़ा। दोनों की उम्र 27 और 31 साल बताई गई। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि वे जेन-जी नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा कि संगठन का उद्देश्य क्या है और याचिकाकर्ताओं का उससे क्या संबंध है।
सरकार ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटा दिया है। इसके बावजूद CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका 13 अक्टूबर को तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे थे। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 14 अक्टूबर को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा।
19 अक्टूबर को उनकी हिरासत खत्म हुई थी, जिसके बाद उनकी कस्टडी 2 दिन के लिए बढ़ा दी गई। दोनों नेताओं ने कस्टडी बढ़ाए जाने को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी।

CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने आशुतोष रांका और सौरव दास के पेशी में जाने का वीडियो शेयर किया था।
हाईकोर्ट ने कहा- अगर जंतर-मंतर पर रोक थी, तो वहां गए क्यों
1. बॉन्ड तोड़ने पर सवाल उठाए: दोनों नेताओं (सौरव-आशुतोष) ने पहले शांति बनाए रखने का बॉन्ड दिया था, लेकिन इसके बाद फिर ऐसी घटना हुई। अगर बॉन्ड तोड़ने की आशंका सच साबित हुई है, तो अधिकारियों का सख्त नियमों के तहत कार्रवाई करना गलत कैसे है?
2. बैरिकेड तोड़ने पर: जब प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार करते हैं, तो उनके साथ 10-20 और लोगों के शामिल होने की आशंका हो सकती है। समूह में शामिल दूसरे लोग ऐसी हरकत कर सकते हैं, जो प्रदर्शनकारियों के नियंत्रण से बाहर हो। इससे शांति भंग होने की स्थिति बन सकती है।
3. शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर: अगर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रखना था, तो पुलिस से अनुमति ली जा सकती थी। इससे ऐसे लोगों को समूह में शामिल होने से रोकने में मदद मिलती, जो प्रदर्शन का माहौल बिगाड़ सकते हैं। अगर जंतर-मंतर पर रोक दी तो वहां गए क्यों?
4. ‘ये जेनजी नहीं हैं’: कोर्ट ने दोनों याचिकाकर्ताओं की उम्र पूछी। उनके वकील ने बताया कि एक की उम्र 27 साल और दूसरे की 31 साल है। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की- ‘ये Gen-Z नहीं हैं।’ कोर्ट ने आगे पूछा कि वे कौन हैं, क्या करते हैं और जिस संगठन से जुड़े हैं, उसका उद्देश्य क्या है।
5. नई याचिका दाखिल करें: दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देने के लिए रिवीजन याचिका का विकल्प मौजूद है, तो अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में याचिका क्यों दायर की गई। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से अपनी याचिकाएं वापस लेने और नई याचिका दायर करने को कहा। दरअसल, अनुच्छेद 226 के तहत सीधे हाईकोर्ट जाकर किसी सरकारी कार्रवाई या आदेश को चुनौती दी जा सकती है, जबकि रिवीजन में निचली अदालत के आदेश को कानूनी आधार पर चुनौती देने का विकल्प होता है।
सौरव और आशुतोष की याचिका में 4 मांगें
1. हिरासत का आदेश रद्द हो: दोनों ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के 19 अक्टूबर के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उनकी हिरासत दो दिन बढ़ाई गई थी।
2. जमानतदारों को स्वीकार किया जाए: उनका कहना था कि उन्होंने जमानतदार पेश किए, लेकिन उन्हें खारिज कर दिया गया। दो और जमानतदार भी मौजूद थे, लेकिन उन्हें पेश करने का मौका नहीं मिला।
3. रिहाई का आदेश दिया जाए: उनके वकील ने निजी मुचलके पर रिहा करने की मांग की। याचिका में कहा गया कि हिरासत जारी रखना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।
4. हिरासत बढ़ाने के आधार पर सवाल: उनका तर्क था कि प्रतिबंधित प्रदर्शन स्थल पर प्रदर्शन की कोशिश अपने आप में सार्वजनिक शांति के लिए खतरे का सबूत नहीं है।
सौरव-आशुतोष के खिलाफ दोनों केस क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर
दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं से जुड़े जंतर-मंतर मामले को भी क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया है। इससे पहले कनॉट प्लेस में दर्ज केस क्राइम ब्रांच को सौंपा गया था। अब दोनों मामलों की जांच क्राइम ब्रांच करेगी।
दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, 13 अक्टूबर को सौरव दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे और CJP के 11 अन्य सदस्य जंतर-मंतर पहुंचे थे। पुलिस का आरोप है कि जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बावजूद वे वहां पहुंचे।
मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसके बाद सभी 14 लोगों को हिरासत में लिया गया और दो FIR दर्ज की गईं। इनमें से एक मामला कनॉट प्लेस से जुड़ा था, जिसे पहले क्राइम ब्रांच को सौंपा गया।
CJP नेताओं की गिरफ्तारी की टाइमलाइन
10 अक्टूबर: जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले दीपके-रांका-दास हिरासत में
कॉकरोच जनता पार्टी SIR के विरोध और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है। पार्टी ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बुलाया था।
उस दिन सुबह CJP फाउंडर अभिजीत दीपके, सौरव और आशुतोष को दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट से ही पुलिस ने हिरासत में लिया था।
तीनों को 11 अक्टूबर को दिल्ली कैंट की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया था। इसके बाद उन्हें 50-50 हजार रुपए के जमानती मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

हिरासत से छूटने के बाद CJP नेताओं ने थंब्स अप का इशारा किया था।
13 अक्टूबर: दास और रांका जंतर-मंतर पहुंचे
जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटाने के एक दिन बाद आशुतोष और सौरव वहां तिरंगा लेकर पहुंचे थे। उनके साथ कुछ प्रदर्शनकारी भी थे। पुलिस ने सभी को हिरासत में लिया था।
16-17 अक्टूबर: दीपके को हिरासत के 24 घंटे में जमानत
आशुतोष और सौरव को हिरासत में लिए जाने के विरोध में CJP ने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में लहरा दो तिरंगा रैली बुलाई थी।
दीपके को रैली से पहले हिरासत में ले लिया गया था। इसके बाद उन्हें 50 हजार रुपए के बेल बॉन्ड पर 17 अक्टूबर को जमानत मिली थी।

अभिजीत दीपके को शनिवार शाम को रिहा किया गया। वे गाड़ी में विक्ट्री साइन दिखाते नजर आए।
दीपके ने लीडरशिप वाले बयान पर दी सफाई
पहले कहा- मैं आशुतोष-सौरव के ऑर्डर फॉलो करता था
CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने आशुतोष और सौरव को आंदोलन का असली लीडर बताने वाले बयान पर नया वीडियो जारी कर सफाई दी है।
दरअसल, दीपके ने मंगलवार को 16 मिनट का वीडियो जारी कर कहा था कि इस आंदोलन को असल में आशुतोष और सौरव ने आगे बढ़ाया है। मैं तो बस उनके ऑर्डर फॉलो करता था। मैं लीडर नहीं था, आंदोलन का असली नेतृत्व इन दोनों ने किया है। वो मुझे बताते थे कल तुझे ये करना है, यहां जाना है, और मैं वो करता था।
दीपके के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना हुई। कुछ यूजर्स ने आरोप लगाया कि वह खुद को बचाने के लिए आंदोलन की जिम्मेदारी सौरभ और आशुतोष पर डाल रहे हैं।

दीपके ने मंगलवार को कहा कि CJP के जेल में बंद कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका का शांतिपूर्वक जेल जाना गांधीवादी सत्याग्रह का सबूत है।
बाद में कहा- बेहतर लोगों को स्वीकार करने में झिझक नहीं
दीपके ने देर रात में एक और वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सौरव और आशुतोष उनसे ज्यादा तेज और प्रतिभाशाली हैं। संगठन में तानाशाही सोच के लिए जगह नहीं है और अपने से बेहतर लोगों को स्वीकार करने में उन्हें कोई झिझक या असुरक्षा नहीं है। सौरव और आशुतोष फैसले लेने और परिस्थितियों को समझने में उनसे बेहतर हैं।

कॉकरोच पार्टी ने जंतर-मंतर पर 36 दिन प्रदर्शन किया था
कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जून से 25 जुलाई तक NEET पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए प्रदर्शन किया था। 36 दिन तक चले इस प्रदर्शन के दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर बैठे थे।
20 जुलाई को CJP ने संसद तक का मार्च भी किया था। 25 जुलाई को प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शन खत्म हो गया था।









