
29 सितंबर की शाम। 6.40 बज रहे थे। जगह- जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में सेवा नदी पर बने हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट का कैंपस। यहां CISF के जवान तैनात हैं। रोज की तरह काम चल रहा था, तभी हेड कॉन्स्टेबल अवधेश कुमार सिंह की साथियों से कहासुनी हो गई।
झगड़ा उनके बच्चे को कैंपस में लाने पर था। कहासुनी के बाद अवधेश कुमार सिंह ऑपरेशंस सेक्शन के ऑफिस पहुंचे और अपनी AK-47 राइफल से साथियों पर गोलियां चला दीं। चार जवान घायल हो गए। उन्हें नजदीकी NHPC अस्पताल ले जाया गया, लेकिन जान नहीं बच सकी।
मरने वालों में असिस्टेंट कमांडेंट और कंपनी कमांडर अंकित कुमार पांडेय, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह, कॉन्स्टेबल मोहम्मद रफीक और संजीव कुमार शामिल थे।
घटना के बाद दूसरे जवानों ने अवधेश कुमार सिंह को काबू किया। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर हथियार जब्त कर लिया। CISF ने भी जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश दिए।

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में CISF जवान अवधेश कुमार सिंह की फायरिंग में इन जवानों की मौत हो गई।
यह फैट्रिसाइड, यानी अपने साथियों पर गोली चलाने का मामला है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, बीते 5 साल में 24 जवानों ने फैट्रिसाइड किया। वहीं, 2019 से 2025 के बीच 1016 जवान सुसाइड कर चुके हैं।
आखिर CAPF यानी सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस में ऐसे हालत क्यों हैं, पढ़िए और देखिए इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में…
1. जवान कम, ड्यूटी ज्यादा; नींद के लिए भी वक्त निकालना मुश्किल
CAPF और असम राइफल्स में 93,139 पद खाली हैं। CISF के पूर्व ADG एचआर सिंह के मुताबिक, पद खाली होने से जवानों पर ड्यूटी का अतिरिक्त बोझ है। 2 की जगह 4 घंटे ड्यूटी करनी पड़े, तो नींद पूरी नहीं हो पाती। इसका असर मेंटल हेल्थ पर होता है। ड्यूटी का वक्त भी तय नहीं होता।
BSF के उदाहरण से समझें, तो एक जवान की 6-6 घंटे की दो शिफ्ट होती हैं। पहली शिफ्ट सुबह 6 से दोपहर 12 और दूसरी शाम 6 से रात 12 बजे तक होती है। सुबह 6 बजे ड्यूटी पर जाने के लिए सुबह 4 या साढ़े 4 बजे तक उठना ही पड़ता है। नहाना-धोना, नाश्ता करना, हथियार लेना और कुछ मिनट परिवार से बात क्योंकि फोन साथ में लेकर नहीं जा सकते।
कम से कम 15 मिनट पहले कैंप से बॉर्डर आउट पोस्ट के लिए निकलना पड़ता है। 12 बजे ड़्यूटी खत्म होने के बाद जवान कैंप में लौटते हैं। हथियार जमा करते हैं। खाना खाते हैं। कुछ देर परिवार से बात करते हैं। फिर शाम की शिफ्ट में जाने से पहले कैंप में मेंटेनेंस का काम करना होता है, क्योंकि कैंप में सिविलियंस की एंट्री नहीं है। पूरा मेंटेनेंस जवानों को ही करना पड़ता है। ऐसे में दो शिफ्ट में मिलाकर बमुश्किल 5 घंटे ही सो पाते हैं।
सॉल्यूशन: खाली पद भरे जाएं। जहां काम ज्यादा है, वहां जवानों की संख्या भी ज्यादा हो। ड्यूटी के साथ आराम का समय तय हो।

2. छुट्टी का नियम है, लेकिन जरूरत के वक्त नहीं मिलती
जवानों को जरूरत के वक्त हमेशा छुट्टी बमुश्किल मिल पाती है। घर में बीमारी, बच्चों की परेशानी या कोई जरूरी काम, कई बार टालने पड़ते हैं। त्योहारों में भी बहुत से जवान घर नहीं जा पाते।
CRPF में तैनात यूपी के जवान विनीत सिंह ने 5 अगस्त 2026 को मणिपुर में कैंप में खुद को गोली मार ली थी। उनकी पत्नी नेहा सिंह ने बताती हैं, ‘मेरे पति को छुट्टी नहीं मिल रही थी। ट्रेनिंग के साथ ही उनकी ड्यूटी भी चल रही थी। कई दिनों से बुखार था। वे सो नहीं पा रहे थे। रात में 2 बजे सोते थे, सुबह 4 बजे उठ जाते थे। अचानक मुझे उनकी मौत की खबर मिली। वे सुसाइड नहीं कर सकते। मैं सच जानना चाहती हूं कि उनके साथ हुआ क्या।’
गृह मंत्रालय ने दिसंबर 2025 में लोकसभा में बताया था कि फील्ड में तैनात CAPF जवानों को साल में 60 दिन की अर्न लीव और 15 दिन की कैजुअल लीव मिलती है। हालांकि, छुट्टी का प्रावधान होना और जरूरत के वक्त छुट्टी मिल पाना, दोनों अलग बातें हैं। मंत्रालय की टास्क फोर्स ने भी छुट्टी से जुड़ी परेशानियों को जवानों में तनाव की वजह में गिना था।
एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी रणवीर सिंह के मुताबिक, कई बार अफसर जवानों की समस्या को नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ अपशब्द भी कह देते हैं। ऐसे में जवान आपा खो देते हैं।
सॉल्यूशन : जवानों को वक्त पर छुट्टी दी जाए। छुट्टी न मिलने पर वजह बताई जाए और बात रखने का मौका मिले।

3. सिपाही हो या अफसर, कई साल तक एक ही पद
CAPF में जवानों का प्रमोशन 18 से 20 साल में होता है। मतलब यदि कोई सिपाही की पोस्ट पर जॉइन हुआ है, तो अगले 20 साल तक सिपाही ही रहेगा। अफसरों के प्रमोशन में भी इतना ही वक्त लग रहा है।
CISF के पूर्व ADG एचआर सिंह बताते हैं कि CAPF में प्रमोशन वैकेंसी बेस्ड होता है। हर पांच साल बाद कैडर रिव्यू होना चाहिए। इसमें देखा जाता है कि फंक्शनल रिक्वायरमेंट क्या हैं, लेकिन 2021 के बाद से कैडर रिव्यू ही नहीं हुआ।
सालों तक प्रमोशन न होने से सैलरी तो बढ़ती जाती है, लेकिन पोजीशन में बदलाव नहीं होता। ऐसे में जवानों और अफसरों को जो मोटिवेशन मिलना चाहिए, वो नहीं मिल पाता।
CRPF के एक सीनियर अफसर कहते हैं, ‘जब ग्रुप कमांडर ही डिमोटिवेट रहेगा, तो टीम को कैसे मोटिवेट करेगा। वो अपना गुस्सा जवानों पर निकलता है। जवान किसी पर गुस्सा निकाल नहीं सकते, इसलिए कभी सुसाइड करते हैं, कभी फ्रेट्रिसाइड जैसी घटनाएं सामने आती हैं।’
गृह मंत्रालय ने अगस्त 2024 में लोकसभा में बताया था कि CAPF में प्रमोशन से जुड़े खाली पद भरने के लिए विभागीय पदोन्नति समितियों की बैठकें समय पर कराने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, करीब 13 हजार CAPF कैडर अधिकारी अलग-अलग रैंकों पर प्रमोशन के इंतजार में हैं।
सॉल्यूशन: प्रमोशन की प्रोसेस समय पर पूरी हो। कौन-सा पद खाली है, किसका प्रमोशन अटका है और देरी क्यों हो रही है, इसकी जानकारी साफ रखी जाए। कैडर रिव्यू और प्रमोशन से जुड़े कोर्स समय पर हों, ताकि जवान सालों तक इंतजार न करता रहें।

4. ड्यूटी एक जगह, परिवार दूसरी जगह
CAPF जवानों की ड्यूटी बॉर्डर एरिया, पहाड़ों, जंगलों, रेगिस्तान और दुर्गम इलाकों में होती है। यहां न कोई इंफ्रास्ट्रक्चर होता है और न ही किसी तरह की सुविधाएं। ऐसे में चाहकर भी जवान परिवार को साथ नहीं रख सकते। परिवार से दूर रहना मजबूरी हो जाती है।
CRPF में असिस्टेंट कमांडेंट रहे सर्वेश त्रिपाठी के मुताबिक, सरकार ने 100 दिन छुट्टी का वादा किया था, लेकिन पूरा नहीं हो पाया। दूर रह रहे जवान परिवार के साथ वक्त नहीं बिता पाते। शहरी इलाकों में परिवार को साथ रखने की सुविधा मिलती है, लेकिन क्वार्टर बहुत कम हैं। इसलिए सभी को परिवार के लिए क्वार्टर नहीं मिल पाता।
गृह मंत्रालय ने 11 फरवरी 2026 को राज्यसभा में बताया कि 1 सितंबर 2022 से 5 फरवरी 2026 के बीच CAPF eAwas पोर्टल के जरिए CAPF और असम राइफल्स के जवानों को कुल 1,46,566 परिवार आवास अलॉट किए गए। इनमें CRPF को 50,812, BSF को 48,854, ITBP को 18,324, SSB को 13,899, असम राइफल्स को 7,611 और CISF को 7,066 आवास अलॉट किए गए।
सॉल्यूशन: जहां फैमिली को साथ रखा जा सकता है, वहां घर अलॉट होना चाहिए। दूरदराज के इलाकों में पोस्टिंग है, तो परिवार से मिलने और बातचीत की बेहतर फेसिलिटी हो। लंबे समय तक ऐसे इलाकों में रहने वाले जवानों की तैनाती का वक्त पर रिव्यू होना चाहिए।
5. शिकायत किससे करें, अगर परेशानी ही अफसर से हो
अगर किसी जवान को अफसर से परेशानी है, तो उसके लिए शिकायत करना मुश्किल हो जाता है। ड्यूटी, पोस्टिंग या करियर पर असर पड़ने का डर होता है। गृह मंत्रालय की टास्क फोर्स ने भी सुसाइड-फैट्रिसाइड की पीछे अफसरों और जवानों के बीच कम बातचीत, भेदभाव और मिसबिहेव को भी वजह माना है।
सॉल्यूशन: शिकायत करने के लिए ऐसा रास्ता हो, जहां जवान बिना डर अपनी बात रख सके। सॉल्युशन की टाइमलाइन तय हो।
CAPF के बारे में जानिए…

नया कानून लागू : CAPF की सीनियर पोजीशन पर IPS अधिकारियों की नियुक्ति होती रहेगी
केंद्र सरकार ने CAPF में सीनियर अधिकारियों की नियुक्ति से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। 8 अक्टूबर 2026 से सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) एक्ट, 2026 लागू हो चुका है। नए कानून के तहत CRPF, BSF, CISF, ITBP और SSB में बड़े पदों पर IPS अधिकारियों की नियुक्ति के लिए प्रावधान किए गए हैं।
नियमों के अनुसार, IG के 50% पद प्रतिनियुक्ति से भरे जाएंगे। ADG के कम से कम 67% पद प्रतिनियुक्ति से भरे जाने का प्रावधान है, जबकि स्पेशल डायरेक्टर जनरल, यानी SDG और DG के पद प्रतिनियुक्ति के जरिए भरे जाएंगे।
इस कानून को लेकर CAPF में नाराजगी है। रणवीर सिंह कहते हैं कि शीर्ष पदों पर IPS ऑफिसर की नियुक्ति होने से CAPF के अपने कैडर के अधिकारियों के आगे बढ़ने के मौके और कम हो जाएंगे। किसी फोर्स में कई साल काम करने वाले अधिकारियों के शीर्ष पर जाने से वे फोर्स को ज्यादा अच्छे से मैनेज कर पाते हैं।
वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि CAPF के बड़े पदों पर IPS अधिकारियों की तैनाती इसलिए जरूरी है क्योंकि उन्हें राज्य में पुलिस-प्रशासन के साथ काम करने और इंटरनल सिक्योरिटी संभालने का अनुभव होता है। इससे अलग-अलग राज्यों के साथ तालमेल बनाने में मदद मिलती है।









