
हाईकोर्ट: 3 साल बाद भी ICAR की मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया
उदयपुर। राज्य में पिछले तीन वर्षों से नियम और तय मानकों के बिना संचालित हो रहे निजी कृषि महाविद्यालयों पर कृषि विभाग के बाद अब हाईकोर्ट ने भी शिकंजा कस दिया है। वर्ष 2022 की राज्य कृषि शिक्षा नीति की अनिवार्य शर्तों का पालन नहीं करने पर हाईकोर्ट ने कृषि विभाग की ओर से इनके अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) रद्द करने के फैसले को सही ठहराया है।
हाईकोर्ट की ओर से सात प्रमुख निजी कृषि कॉलेजों की याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद प्रदेश के लगभग 42 निजी कृषि कॉलेजों में इस शैक्षणिक सत्र में नए दाखिले नहीं होंगे। इनमें 31 निजी कृषि कॉलेज और 11 प्राइवेट यूनिवर्सिटी से संबद्ध कृषि कॉलेज शामिल हैं।
यदि प्रति कॉलेज न्यूनतम 60 स्वीकृत सीटें भी मानी जाएं, तो इस बार संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JET) के जरिए करीब 2520 बीएससी कृषि सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित होगी।
इन 7 कॉलेजों की याचिकाएं खारिज
1. एसकेडी कृषि कॉलेज (हनुमानगढ़)
2. श्री विनायक कृषि कॉलेज (जयपुर)
3. एसएलबीएचएस कृषि कॉलेज (जोधपुर)
4. श्रीनाथजी कृषि कॉलेज (नाथद्वारा)
5. अपेक्स कृषि संस्थान (कोटा)
6. ब्राइट करियर कृषि कॉलेज (नोखा)
7. सौरभ कृषि कॉलेज (हिंडौन)

काउंसलिंग के बीच विभाग ने रोकी थी एनओसी
बीकानेर स्थित स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय की जेट काउंसलिंग-2026 के बीच कृषि आयुक्त ने नियमों की अनदेखी करने वाले कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इस आदेश के खिलाफ निजी कृषि कॉलेजों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। खबर के अनुसार, न्यायाधीश नूपुर भाटी ने याचिकाएं खारिज कर दीं।
अदालती आदेश के बाद विभाग ने 42 कॉलेजों की मान्यता से संबंधित कार्रवाई की। पहले से अध्ययनरत छात्रों की पढ़ाई पर असर नहीं पड़ने और उन्हें अपनी डिग्री पूरी करने देने की बात भी खबर में कही गई है।
इन नियमों का उल्लंघन
नीति की शर्तें: 20 सितंबर 2022 की नीति के खंड 8.2 के तहत लागू अनिवार्य शर्तों का पालन नहीं।
- ICAR मान्यता: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की मान्यता के लिए निर्धारित समय-सीमा में आवेदन नहीं किया।
- स्टाफ की नियुक्ति: तय मानकों के अनुसार योग्य शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ की नियुक्ति नहीं।
- वेतन और सुविधाएं: नियमित वेतन, भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा और बायोमेट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था में कमी
- वेबसाइट: कई कॉलेजों की आधिकारिक वेबसाइट और आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं थी।

6 साल की मियाद
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि ICAR की मान्यता प्राप्त करने के लिए छह वर्ष का समय मिलता है। लेकिन खबर के अनुसार, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों के उल्लंघन में इस आधार पर छूट नहीं दी जा सकती।
हाईकोर्ट ने कहा
शिक्षा की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।







