
नैनवां में शांति वीर धर्मस्थल पर शनिवार को वर्षायोग के दौरान आयोजित धर्मसभा में आर्यिका संस्कृति श्री माताजी ने श्रद्धालुओं को धर्म, सदाचार और पुरुषार्थ का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पुरुषार्थ से ही भाग्य चमकता है और बिना मेहनत व प्रयास के जीवन में सफलता प्राप्त करना संभव नहीं है। मनुष्य को हमेशा अच्छे कर्म करते हुए धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए।
कर्मों के आधार पर बनता है जीवन
माताजी ने कहा कि संसार के प्रत्येक जीव का अपना महत्व है। आत्मा के शरीर में रहने तक शरीर बहुमूल्य होता है, लेकिन आत्मा के निकलते ही शरीर नश्वर हो जाता है। मनुष्य अपने मन के भावों के अनुसार अच्छे और बुरे कर्म करता है। इसलिए उसे अपने कर्मों की जिम्मेदारी स्वयं समझनी चाहिए। भगवान किसी के साथ भेदभाव नहीं करते, ऐसे में अपने दुखों के लिए भगवान को दोष देने के बजाय आत्मचिंतन करना चाहिए।
संतों के आगमन से बढ़ता है धर्म और सद्भाव
माताजी ने कहा कि बड़े महल और हवेलियां भी संतों के आगमन से शोभायमान होती हैं। संतों के दर्शन, आहार और प्रवचन से लोगों को धर्मलाभ मिलता है। संत समाज को जोड़ने का काम करते हैं, तोड़ने का नहीं। उनके सान्निध्य से समाज में सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है।
अच्छे कर्म ही मनुष्य की सच्ची पहचान
पुरुषार्थ का महत्व समझाते हुए माताजी ने मुर्गे का उदाहरण दिया, जो सुबह आवाज लगाकर लोगों को जगाता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को भी अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। जंगल का शेर भले ही मनुष्य को छोड़ दे, लेकिन उसके कर्म कभी उसका पीछा नहीं छोड़ते। इसलिए जीवन में बुरे कर्मों से बचकर सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। धर्मसभा का मंगलाचरण प्रवक्ता महावीर सरावगी ने किया।







