
कल 27 अक्टूबर की सुबह 7 बजे तक कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा यानी पहली तिथि है, इसके बाद द्वितीया तिथि शुरू हो जाएगा। कार्तिक मास हिन्दी पंचांग का आठवां महीना है और यह 24 नवंबर तक रहेगा। इस महीने में धनतेरस, रूप चौदस, दीपावली जैसे पर्वों के साथ ही कई और भी बड़े व्रत-उत्सव मनाए जाते हैं। इस वजह से कार्तिक को उत्सवों का महीना भी कहते हैं।
कार्तिक मास में भगवान गणेश, कार्तिकेय स्वामी, धनवंतरि, यमराज, महालक्ष्मी, विष्णु जी, गोवर्धन पर्वत, छठ माता और सूर्य देव की विशेष पूजा करने की परंपरा है। इस महीने में इन देवी-देवताओं से जुड़े व्रत-पर्व पड़ते हैं। जानिए किस व्रत-उत्सव में कौन-कौन से शुभ काम किेए जा सकते हैं…
- 29 अक्टूबर – करवा चौथ: सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। व्रत करने वाली महिलाएं दिनभर निराहार और निर्जल रहने के बाद शाम को मां पार्वती, शिव जी, गणेश जी, चौथ माता की पूजा करके करवा चौथ की कथा सुनती हैं। इसके बाद चंद्र को अर्घ्य देकर जल ग्रहण करती हैं।
- 1 नवंबर – अहोई अष्टमी: यह व्रत संतान के सुखी जीवन, लंबी और सौभाग्य की कामना से महिलाएं करती हैं। इस दिन अहोई माता की विशेष पूजा की जाती है।
- 5 नवंबर – रमा एकादशी: इस तिथि भगवान विष्णु के साथ ही देवी लक्ष्मी का पूजन करना चाहिए। रमा महालक्ष्मी का ही एक नाम है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु की कृपा पाने की कामना से व्रत करते हैं।
- 6 नवंबर – धनतेरस: यह भगवान धनवंतरि, महालक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा करने का पर्व है। इस दिन सोना, चांदी, पीतल के बर्तन या नई झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। शाम को घर की दक्षिण दिशा में यमराज के नाम का चौमुखी दीपक (यम दीप) जलाने की परंपरा है।
- 7 नवंबर – रूप चौदस (नरक चतुर्दशी): इस पर्व पर श्रद्धालु को सुबह सूर्योदय से पहले जागना होता है, इसके बाद उबटन लगाकर स्नान किया जाता है, माना जाता है कि ऐसा करने से रूप और सौंदर्य की प्राप्ति होती है। शाम को यमराज के निमित्त दीपदान करते हैं और घर के सभी कोनों व मुख्य द्वार पर दीपक जलाते हैं।
- 8 नवंबर – दीपावली: इस दिन शुभ मुहूर्त में माता लक्ष्मी, भगवान विष्णु, भगवान गणेश और कुबेर जी के साथ ही अपने इष्टदेव का विधिवत पूजन करते हैं। घर को वंदनवार, रंगोली और दीयों से सजाते हैं। देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए मुख्य द्वार पर अखंड दीपक जलाते हैं और पूरे घर में रोशनी की जाती है।
- 9 नवंबर – कार्तिक अमावस्या और गोवर्धन पूजा (अन्नकूट): इस बार तिथियों की घट-बढ़ की वजह से कार्तिक अमावस्या दो दिन (8-9 नवंबर) है। इसलिए कार्तिक अमावस्या का नदी स्नान और दान-पुण्य 9 तारीख को किया जाएगा। कुछ पंचांगों में इसी दिन गोवर्धन पूजा पर्व बताया गया है। जो लोग इस दिन गोवर्धन पूजा करेंगे, वे गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर उनकी पूजा करेंगे। भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग या अन्नकूट का प्रसाद अर्पित किया जाता है।
- 10 नवंबर – गोवर्धन पूजा और भाई दूज: कुछ क्षेत्रों में 10 तारीख को गोवर्धन पूजा मनाई जाएगी, जबकि कुछ जगहों पर इस दिन भाई दूज मनेगी। भाई दूज पर बहने अपने भाइयों को घर बुलाकर तिलक लगाती हैं, खाना खिलाती हैं, उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं। इस दिन यमराज और यमुना जी की कथा सुनी जाती है। कुछ जगहों पर भाई दूज 11 नवंबर को मनाया जाएगा।
- 15 नवंबर – छठ पूजा (संध्या अर्घ्य): इस तिथि पर शाम के समय नदी या तालाब के घाट पर जाकर डूबते हुए सूर्य (अस्ताचलगामी सूर्य) और छठ माता को अर्घ्य देने की परंपरा है।
- 18 नवंबर – अक्षय नवमी (आंवला नवमी): इस दिन आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन बनाकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन आंवले के वृक्ष की परिक्रमा और दान करने का विशेष महत्व है।
- 20 नवंबर – देवउठनी एकादशी: भगवान विष्णु को चार महीने की योगनिद्रा से जगाने के लिए पूजा और मंत्रोच्चार किया जाता है। इस दिन तुलसी जी और भगवान शालिग्राम का विवाह कराया जाता है।
- 24 नवंबर – कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली): इस तिथि पर ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी में स्नान करते हैं। शाम के समय नदी के घाटों, मंदिरों और घर पर दीपदान करते हैं। सत्यनारायण भगवान की कथा सुनी जाती है और दान-पुण्य किया जाता है।







