
सर्जरी के बाद जब हल्का-हल्का होश आया तो सबसे पहले मेरा हाथ छाती पर गया। डॉक्टर ने एक ब्रेस्ट हटा दिया था। मेरी बीमारी चली गई, लेकिन उसके साथ ही मैंने औरत होने का अहसास खो दिया। ऐसा लगा कि अब शादीशुदा जिंदगी का क्या होगा। बहुत रोई।
शादी से पहले एयरहोस्टेस थी। अब मैं मां हूं, पत्नी हूं, लेकिन वो औरत नहीं जो कैंसर से पहले थी। जब कभी मेरे पास कोई भी औरत आती है, भले ही वो मेरी सास जैसी उम्रदराज हो या कोई और, मेरी पहली नजर उनके सीने की तरफ जाती है। सोचती हूं कि ये सब मेरे साथ ही क्यों हुआ।
आज ब्लैकबोर्ड में स्याह कहानी एक ऐसी महिला की जिसे 30 साल की उम्र में कैंसर हुआ और उसका एक ब्रेस्ट रिमूव कर दिया गया…
मुरादाबाद की रहने वाली मनु शर्मा एयर होस्टेस थीं। साल 2020 में उन्होंने नौकरी छोड़कर बिजनौर के रहने वाले निशांत से शादी कर ली। निशांत नोएडा में एक आईटी कंपनी में काम करते हैं। शादी के बाद दोनों नोएडा में रहने लगे। साल 2021 में मनु एक बेटे की मां बनीं। बेटा तीन साल का हुआ ही था कि अचानक मनु की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई।

मनु बताती हैं- जब पता चला कि मुझे तीसरी स्टेज का ब्रेस्ट कैंसर है, तो मैं बुरी तरह डर गई। उस वक्त मेरा बेटा सिर्फ तीन साल का था।
मनु बताती हैं कि साल 2024 की बात है। सितंबर के महीने में मुझे ब्रेस्ट में कुछ गांठें महसूस हुईं। धीरे-धीरे दर्द बढ़ने लगा। नोएडा में डॉक्टर को दिखाया तो वो बोले- घबराने की कोई जरूरत नहीं है। साल 2025 में बिजनौर में डॉक्टर को दिखाया। एडवांस टेस्ट और कैंसर के लिए बायोप्सी टेस्ट हुए। रिपोर्ट पति निशांत के फोन पर आई।
निशांत कहते हैं कि रिपोर्ट की बात सुनते ही मनु मेरे बगल में आकर बैठ गई। रिपोर्ट समझ नहीं आई तो मैंने गूगल किया। जो पता चला उसके बाद मनु की तरफ देखते ही मैं फूट-फूट कर रोने लगा। हाथ से फोन छूट गया। सामने बेटा बैठा था। मैंने उसे और मनु दोनों को सीने से लगा लिया। मुझे रोता देखकर मनु बिना बताए ही समझ गई कि उसको कैंसर है।
अगले दिन डॉक्टर के पास गए तो वो बोले- ‘फौरन इलाज शुरू नहीं हुआ तो कैंसर हडि्डयों में फैल जाएगा। कीमोथैरेपी के आठ सेशन होंगे, जो हर 21 दिन में होंगे। तीसरे या चौथे सेशन के बाद, बाल, पलक, आईब्रो सब झड़ने लगेंगी।’ मैंने बोला अब जो भी हो देखा जाएगा, मनु का ठीक हो जाना सबसे ज्यादा जरूरी है।
मनु कहती हैं, मेरे तीन साल के बेटे को संभालने वाला कोई नहीं था। ससुराल से कोई बेटे को संभालने के लिए आता, तब मैं कीमो कराने जाती थी। कीमो के लिए डॉक्टर ने मुझे कीमो पोर्ट लगवाने की सलाह दी थी। पहली कीमो के लगभग एक हफ्ते पहले सर्जरी कर के मेरे गले से थोड़ा नीचे और ब्रेस्ट से थोड़ा ऊपर कीमो पोर्ट लगाया गया। इसकी वजह से कीमो थैरेपी में नसों में जो दर्द होता है और वो डैमेज हो जाती हैं, उससे बच जाते हैं।
जब पहले कीमो के लिए हॉस्पिटल गई तो मुझे बेड पर लिटाया गया। कीमो पोर्ट से एक ड्रिप अटैच की गई, जिससे दवा धीरे-धीरे अंदर गई। अचानक बदन में ऐंठन शुरू हो गई। मेरे होंठ बुरी तरह से सूखने लगे। प्यास लग रही थी, लेकिन पानी नहीं दिया गया। कीमो होने के बाद मैं खड़ी तक नहीं हो पा रही थी।

कीमो के दौरान मनु के पति निशांत उससे कहते थे- हम कैंसर से जीत कर रहेंगे।
हर कीमो के बाद जब देर रात घर लौटती तब दर्द का सिलसिला शुरू हो जाता। ऐसा तेज दर्द उठता जैसे कोई धारदार हथियार से शरीर चीर रहा हो। कीमो के बाद कभी अचानक उल्टी होने लगती, तो कभी एंग्जायटी अटैक आने लगते।
एक बार कीमो करवाकर लौटी तो रातभर उल्टी हुई। पहले सोचा पति को बताऊं, लेकिन जब उन्हें सोते हुए देखा तो नींद से उठाने की हिम्मत नहीं कर पाई। गिल्ट होने लगा कि मेरी बीमारी की वजह से पति की जिंदगी भी पहले जैसी नहीं रही। आखिर सुबह अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। तब पति ने मुझे समझाया कि ‘अपना हर दर्द, हर बात मुझे तुरंत बताओ। गिल्ट से ज्यादा जरूरी तुम्हारी जिंदगी है।’
पहले कीमो के बाद जब घर लौटी और बालों को हाथ लगाया तो गुच्छा का गुच्छा बाल हाथ में आ गया। डॉक्टर ने बोला था कि ये सब तीसरे या चौथे कीमो से होगा, इसलिए मैं मानसिक तौर पर तैयार नहीं थी। बुरी तरह से घबरा गई। इतने लंबे बाल थे, देखते ही देखते सब चले गए।

मनु बताती हैं, पहली कीमोथेरेपी के बाद ही उनके बाल झड़ने लगे। जब भी बालों में हाथ फेरतीं, बालों का एक गुच्छा हाथ में आ जाता।
तीसरे कीमो को चार दिन ही बीते थे। मैं सुबह-सुबह शीशे के सामने खड़ी हुई और खुद को देखकर रोने लगी। मेरी आईब्रो और पलकें भी नहीं थीं। पूरा चेहरा उबले हुए आलू की तरह दिख रहा था। बहुत डरावनी लग रही थी। लगातार कई घंटों तक रोती रही कि यह क्या हो गया मुझे, मैं क्या करूं। कैसे बदल दूं अपनी शक्ल। फिर तय किया कि आज के बाद शीशा नहीं देखूंगी।
हालांकि, घर में कुछ जगहों पर शीशे लगे हुए थे, आते-जाते उनमें झलक दिख जाती थी। एक दिन ऐसे ही गुस्से में मैंने अपना मेकअप का सारा सामान डस्टबिन में फेंक दिया। अपने ड्रेसिंग से शीशा हटा दिया।
मेरी शक्ल ऐसी हो गई थी कि लोग दूर भागते थे। एक दिन सोसाइटी के मंदिर में गई थी। मुझे देखते ही कुछ औरतें आपस में कानाफूसी करने लगीं। एक औरत ने अपने पति को कोहनी मारकर मेरी ओर देखने का इशारा किया। मुझे उसके हावभाव से पता लग गया कि वो मेरी शक्ल के बारे में बात कर रही है। उस दिन के बाद मैंने मंदिर जाना बंद कर दिया।
मनु ये बातें बताते हुए भावुक हो जाती हैं। कुछ देर बाद कहती हैं- एक दिन शाम के समय मैं पार्क में टहल रही थी। पड़ोसी की मेड भी उनके बच्चे को लेकर पार्क आ गई। वो बच्चा मेरे साथ खेल रहा था, इसलिए मैंने उसे गोद में उठा लिया। बच्चे को मेरी गोद में देखते ही उसकी मां दौड़कर आई और मेरे हाथ से बच्चा छीन लिया। ऐसा लगा जैसे मुझे कोई छूत की बीमारी है।
पड़ोसन ने मेड को डांटते हुए कहा- बच्चा उसकी गोद में देने की क्या जरूरत थी। अगर वो डर जाता तो क्या होता। ये सुनते ही मुझे लगा कि अब मेरी दुनिया घर के भीतर ही है। तय किया कि बाहर के लोगों से कोई बात नहीं करूंगी। धीरे-धीरे मैं खुद में ही सिमट गई।
मैं खूब पूजा-पाठ करती थी। जप करती थी। लेकिन जिस दिन ये सब हुआ मैंने घर आकर मंदिर से भगवान की मूर्तियां डस्टबिन में डाल दीं।
इन सब के बीच इतना सुकून था कि पति पहले की तरह ही प्यार करते थे। वो कहते थे कि तुम मेरे लिए आज भी उतनी सुंदर हो जितनी पहले थी। इसके बाद जब हम डॉक्टर के पास गए तो उन्होंने विग लगाने की सलाह दी। वो बोले कि ‘खूब सारे विग मंगवा लो और सज संवर कर रहा करो।’
घर आते ही मैंने पति से कहा कि विग नहीं लगाऊंगी। पति ने समझाया कि हम विग मंगवा लेते हैं। धीरे-धीरे इस भाव से बाहर निकलना होगा। मैं फिर भी नहीं मानी। इसलिए पति ने चुपके से कई सारे विग ऑर्डर कर दिए।

पति निशांत और बेटे के साथ मनु। वो कहती हैं- निशांत के कहने पर मैंने विग पहनना शुरू किया।
उनके कई बार कहने पर आखिरकार मैंने विग पहनने शुरु किया। विग के ऊपर एक रूमाल बांध लिया करती थी, जो मेरा फैशन स्टेटमेंट भी बन गया। जब आसपास के लोगों ने इस तरह देखा तो बोले- अरे तुम तो काजोल लग रही हो, सुंदर लग रही हो। तब मुझे लगा कि शायद अब मैं फिर पहले जैसी हो जाऊंगी।
आखिरी कीमो के बाद हम सब खुश थे। कीमो खत्म हुए कुछ दिन ही बीते थे कि 30 सितंबर 2025 को डॉक्टरों ने कहा कि एक ब्रेस्ट हटानी पड़ेगी। ये सुनते ही मुझे लगा कि अब सब खत्म हो गया।
मैंने डॉक्टरों से बहुत कहा- ऐसा मत करें, कोई जरिया, कोई हल है तो वो कर लेते हैं। लेकिन डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। उन्होंने समझाया कि ब्रेस्ट नहीं हटाएंगे तो कैंसर जल्दी लौट आ सकता है। इस वक्त जिंदगी बचानी ज्यादा जरूरी है।
मैंने डॉक्टर से कहा कि ये सर्जरी करवाने से मेरी शादीशुदा जिंदगी खतरे में आ जाएगी। ये सुनते ही डॉक्टर हंसने लगीं, फिर बोलीं- ‘आपके पति तो बहुत समझदार हैं। उन्हें तो पहले ही हम बता चुके हैं और उन्होंने कह दिया है कि मनु की जिंदगी ज्यादा जरूरी है।’
मनु कहती हैं कि बेशक पति ने ब्रेस्ट रिमूव करने के लिए हां कर दी थी कि लेकिन मुझे डर था कि पता नहीं अब पति क्या सोचेंगे। हमारा रिश्ता कैसा होगा।
सर्जरी के दिन ऑपरेशन थिएटर के बाहर निशांत मुझे गले लगाकर बहुत रोए। उनकी गोद में हमारा बेटा था। मैंने ओटी में जाते-जाते उनसे केवल इतना कहा कि बेटे का हमेशा ध्यान रखना। वो पूरा दिन ओटी के बाहर खड़े होकर हनुमान चालीसा पढ़ते रहे।
ब्रेस्ट रिमूव होने के साथ ही मेरे कपड़े पहनने का तरीका बदल गया। पहले साड़ी पहनती थी। डीप कट पहनती थी, लेकिन अब फिटिंग के कपड़े नहीं पहन पाती। बेहद ढीले सूट सिलवा कर पहनती हूं।
शादी से पहले एयर होस्टेस थी इसलिए सजने संवरने और सुंदर कपड़े पहनने का बहुत शौक था। लेकिन जब से कैंसर हुआ है तब से लेकर आज तक किसी पार्टी में नहीं गई। पार्टी क्या, अब तो त्योहार भी रस्म के तौर पर ही मनाती हूं।

मनु कहती हैं- अब सजने संवरने का शौक नहीं रहा। कहीं आने-जाने का मन भी नहीं करता।
मेरा कीमो पोर्ट ब्रेस्ट रिमूव सर्जरी के लगभग तीन साल बाद हटाया जाएगा। भले ही ये स्किन के अंदर लगता है, लेकिन इसका बेहद ख्याल रखना पड़ता है।
कपड़े पहनते वक्त ध्यान रखना पड़ता है कहीं कीमो पोर्ट हिल न जाएं। फिर गले का ध्यान रखना होता है कि सूट या ब्लाउज का गला कैसा है। स्लीवलैस नहीं पहन सकती क्योंकि अंडर आर्म तक सर्जरी के निशान हैं। एक पार्टी में जाने के लिए इतना तामझाम करना पड़ता है, इसलिए कहीं नहीं जाती।
कीमो पोर्ट की वजह से किसी भी तरह का वजन उठाने से मना किया है। यहां तक कि बच्चे को भी गोद में लेने से भी मना किया है। आज मेरा बेटा पांच साल का है। जब कैंसर हुआ था तब तीन साल का था।
तब से लेकर आज तक मैंने गोद में नहीं उठाया। उसे पता ही नहीं है कि मां को क्या हुआ। कभी-कभी वो पूछ लेता है कि आप मुझे गोदी क्यों नहीं लेती, तो ये कहकर टाल देती हूं कि मम्मी थक जाती है। मुझे सबसे ज्यादा तकलीफ भी इस बात की है।
निशांत कहते हैं कि मुझे मेरी पत्नी की लाइफ किसी भी कीमत पर चाहिए थी। मैं चाहता था कि मेरे बच्चे की मां हमेशा उसके पास रहे। उसके लिए ब्रेस्ट हटाने से क्या ही फर्क पड़ जाता। ये सर्जरी होने से कौन सा वो मेरे बच्चे की मां या मेरी पत्नी न रहती।
मनु कहती हैं कि सर्जरी के बाद हार्मोन बैलेंस की दवा खानी होती है। जिससे पीरियड न आएं। एक दवा की कीमत 2300 रुपए होती है। यानी 70,000 रुपए महीने का खर्च केवल एक दवा का है और ये मुझे जीवनभर खानी है। इसके अलावा एंग्जायटी और डिप्रेशन हमेशा रहता है। अपनी मर्जी से कहीं जा नहीं सकते। कुछ भी पहन नहीं सकते। कुछ भी खा नहीं सकते।
हालांकि, सिर्फ एक बात का सुकून है कि निशांत आज भी मेरी खूबसूरती की उतनी ही तारीफ करते हैं जितनी पहले किया करते थे। उन्होंने मुझे कभी अहसास नहीं करवाया कि मेरा ब्रेस्ट नहीं है।








