
हरिद्वार में गंगनहर की वार्षिक बंदी के बाद गंगा घाटों पर साढ़े 4 हजार मीट्रिक टन कचरा जमा है। हरिद्वार जिला प्रशासन के मुताबिक, एक साल में करीब 17 करोड़ लोगों ने गंगा में यह कचरा फैलाया है। घाटों के आसपास और रेलिंग पर पुराने कपड़े, प्लास्टिक और पॉलीथीन बिखरी पड़ी हैं।
बुधवार से शुरू हुई गंगनहर की वार्षिक बंदी के बाद कचरा साफ दिखाई देने लगा है। इसे हटाने के लिए नगर निगम 7 नवंबर तक दिन-रात सफाई अभियान चला रहा है। वहीं, सफाई कार्य में मदद के लिए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग से भी सहयोग मांगा जा रहा है।
हरिद्वार में हर साल दशहरे पर गंगनहर की वार्षिक बंदी की जाती है। दिवाली से पहले नहर में दोबारा पानी छोड़ा जाता है। इस दौरान नहर की सफाई और मरम्मत के काम होते हैं। पानी का प्रवाह कम होने पर घाटों और किनारों पर जमा कचरा साफ दिखाई देने लगता है। इस बार भी बंदी के बाद घाटों पर बड़ी मात्रा में पुराने कपड़े और प्लास्टिक नजर आ रहे हैं।
तस्वीरें देखिए-

हरिद्वार में गंगा घाटों के आसपास एक किलोमीटर तक कचरा फैला दिखा।

घाटों के आसपास कमर तक गंदगी जमा दिखी।

गंगनहर की वार्षिक बंदी के बाद हरिद्वार के लोग सफाई करने पहुंचे।
हरकी पैड़ी पर आरती से पहले सफाई
नगर निगम की टीमें दिन-रात सफाई अभियान चला रही हैं। सबसे पहले हरकी पैड़ी क्षेत्र की सफाई की जा रही है। बुधवार शाम गंगा आरती से पहले हरकी पैड़ी क्षेत्र को साफ किया गया। हालांकि, घाटों पर अभी भी काफी कचरा मौजूद है।
संध्या आरती के बाद श्रद्धालुओं की आवाजाही कम होने पर घाटों पर कचरे के ढेर दिखाई दिए।

सफाई के बाद गंगा का पानी साफ नजर आया।
सराय प्लांट में रीसाइकिल होगा कचरा
घाटों से निकाले जा रहे कचरे को ज्वालापुर स्थित सराय कूड़ा ट्रीटमेंट प्लांट भेजा जा रहा है। यहां कचरे को अलग-अलग किया जाएगा। इसके बाद उपयोगी सामग्री निजी कंपनियों को बेची जाएगी। पुराने कपड़ों से भी उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
हरिद्वार में देशभर से श्रद्धालु गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक गतिविधियों के दौरान कई लोग पुराने कपड़े और अनुपयोगी सामग्री गंगा में छोड़ देते हैं। इससे नदी में कचरा बढ़ता है। प्लास्टिक और पॉलीथीन जलीय जीवों के लिए भी खतरा बन सकती हैं।
सफाई अभियान में सामाजिक संस्थाएं भी जुड़ेंगी
मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्र ने बताया कि गंगा बंदी के बाद स्वच्छता अभियान शुरू कर दिया गया है। कई सामाजिक संस्थाओं ने भी अभियान में भागीदारी करने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि गंगा को स्वच्छ रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से गंगा में पुराने कपड़े नहीं डालने और निर्धारित स्थानों पर ही कचरा जमा करने की अपील की। गंगा की स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रशासन के साथ सामाजिक संस्थाओं, धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं का सहयोग भी जरूरी है।








