ड्राइवर का खेती में अनोखा प्रयाेग,खाद खरीदने की जरूरत नहीं:बाजरा का उत्पादन बढ़ा, अब अमरूद और गन्ना से भी अच्छी कमाई की उम्मीद

रासायनिक खाद से खेती में होने वाले खर्च को कम करने के लिए जैविक खेती शुरू की। वर्मी कंपोस्ट की जगह बायोगैस स्लरी (वेस्ट) का इस्तेमाल किया। बाजरे की फसल में जैविक उत्पादन का सफल ट्रायल किया।

उत्पादन बढ़ने के साथ ही बायोगैस से रसोई का खर्च भी कम हुआ है। अब परंपरागत फसलों के साथ दो बीघा में अमरूद से इस बार अच्छी इनकम की उम्मीद है। इसके साथ ही गन्ने की खेती भी कर रहे हैं।

किसान ने ट्रांसपोर्ट लाइन में 6 साल तक ड्राइविंग की। हर महीने आने वाली फिक्स सैलरी से घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में नौकरी छोड़कर खेती संभाली।

पढ़िए, कैसे किसान कम खर्च और बेहतर उत्पादन पर काम कर रहा है…

म्हारे देस की खेती में इस बार बात टोंक के किसान की…

अपने खेत में किसान घासीलाल जाट।

अपने खेत में किसान घासीलाल जाट।

टोडारायसिंह क्षेत्र के दाबड़ दुम्बा गांव के रहने वाले घासीलाल जाट (35) पहले ट्रांसपोर्ट लाइन में ड्राइविंग करते थे। 2009 से 2014 तक करीब 6 साल नौकरी की, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियां पूरी करना मुश्किल हो रहा था। घर पर पिता खेती करते थे, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ उनके लिए खेत का काम करना मुश्किल होने लगा।

ऐसे में नौकरी छोड़कर खेती पर ध्यान देने का फैसला किया। शुरुआत में दूध बेचने का काम किया। खुद के पास पशु कम थे, इसलिए दूसरे लोगों से दूध इकट्ठा करके डेयरी को सप्लाई करने लगे। इसके बाद उन्होंने खेती से कमाई बढ़ाने के लिए नए तरीके अपनाने शुरू किए।

खेती की लागत को घटाने के लिए घासीलाल जाट ने बायोगैस सिस्टम लगाया।

खेती की लागत को घटाने के लिए घासीलाल जाट ने बायोगैस सिस्टम लगाया।

बायोगैस से रसोई का खर्च बचा, स्लरी से उत्पादन बढ़ा

घासीलाल बताते हैं- बदलाव से सब डरते हैं, कोई भी पहले शुरुआत नहीं करना चाहता। लोग पहले दूसरों को देखते हैं, फिर शुरुआत करते हैं। मैंने भी कालाडेरा के पास रहने वाले रामेश्वर धायल के पास बायोगैस का सिस्टम देखा था। साल 2024 में उनके सहयोग से ही 13 हजार रुपए में बायोगैस का ट्यूब और पूरा सिस्टम लिया था।

वर्मी कंपोस्ट को तैयार करने में मेहनत और समय ज्यादा लगता है। खेती का खर्च घटाने के लिए बायोगैस सिस्टम लगाया। दो साल से रसोई के लिए गैस सिलेंडर नहीं खरीदा है। घर की रसोई का पूरा काम बायोगैस से हो जाता है। इससे सालाना 10 हजार रुपए से ज्यादा की बचत हो रही है। बायोगैस से निकलने वाली स्लरी यानी गोबर खेत में खाद के रूप में काम में लिया जा रहा है। इससे फसल के उत्पादन पर भी अच्छा असर दिख रहा है।

बायोगैस से रसोई का खर्च घटा है। साथ ही स्लरी से खाद की लागत घटी है।

बायोगैस से रसोई का खर्च घटा है। साथ ही स्लरी से खाद की लागत घटी है।

गोबर से गैस और खाद दोनों तैयार हो रहे

घासीलाल बताते हैं- 10 फीट लंबे और 7 फीट चौड़े ट्यूब से रोजाना करीब 2 से 3 घंटे तक गैस मिल जाती है। 20 किलो गोबर में करीब 40 लीटर पानी मिलाना पड़ता है। सर्दियों में इसे रोजाना डालना होता है, जबकि गर्मियों में तीन दिन का अंतर रखा जा सकता है। गोबर डालने के बाद ट्यूब में गैस बनती है। यह पाइप के जरिए रसोई तक पहुंचती है।

पाइप से ट्यूब में गोबर तरल रूप में हो जाता है। दूसरे पाइप से स्लरी बाहर निकलती है। इसे फसलों को देने में आसानी रहती है। बाहर निकलने वाली स्लरी को इकट्ठा करके जरूरत के हिसाब से खेत में इस्तेमाल किया जा सकता है। स्लरी कच्चे गोबर के मुकाबले ज्यादा असरदार खाद साबित हो रही है और इससे खेत की उपज बढ़ाने में मदद मिलती है।

अमरूद का बाग भी लगाया

घासीलाल बताते हैं- परंपरागत फसलों में किसानों को ज्यादा मुनाफा नहीं मिल पाता, क्योंकि बाजार में कई बार उपज के अच्छे भाव नहीं मिलते। इसी वजह से खेत में दूसरी फसलें लगाने के साथ अमरूद का बाग भी लगाया। साल 2023 में सरकारी नर्सरी से 50 रुपए प्रति पौधे के हिसाब से 150 पौधे खरीदे और दो बीघा जमीन में लगाए। इनमें से 30 पौधे नष्ट हो गए।

2025 में पहली बार अमरूद में फल आए। इस बार अक्टूबर में फिर फल लगने शुरू हो गए हैं। एक पेड़ पर 170 तक अमरूद लगे हैं और एक अमरूद का वजन करीब 300 ग्राम तक है। मौसम और फलों की स्थिति ठीक रही तो नवंबर के आखिरी सप्ताह तक तुड़ाई शुरू हो जाएगी। इस बार अमरूद से एक लाख रुपए से ज्यादा कमाई होने की उम्मीद है।

अमरूद के साथ उड़द की खेती, गन्ने में भी प्रयोग

किसान घासीलाल बताते हैं- अमरूद के पेड़ों के बीच खाली जगह का इस्तेमाल करने के लिए उड़द की खेती भी की। इस बार उड़द की करीब एक क्विंटल उपज हुई है। बाजार में उड़द का भाव 9 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक मिल रहा है।

29 मई 2026 को आधा बीघा जमीन में गन्ना लगाया है। इसे भी जैविक तरीके से तैयार कर रहे हैं। गन्ने का बीज सरकारी नर्सरी से लिया था, जिस पर 13 हजार रुपए खर्च हुए।

आधा बीघा में गन्ने से करीब 50 हजार रुपए की कमाई हो सकती है। फसलों में खाद के रूप में जीवामृत और बायागैस सिस्टम से तैयार होने वाली स्लरी को उपयोग किया जा रहा है।

जैविक खेती में बाजरे की पैदावार ज्यादा मिली

घासीलाल ने इस बार आधा-आधा बीघा जमीन में दो अलग-अलग जगह बाजरा लगाया। एक जगह जैविक तरीके से और दूसरी जगह रासायनिक खाद का इस्तेमाल करके खेती की। वे बताते हैं कि जैविक तरीके से लगाए बाजरे की पैदावार ज्यादा हुई। जैविक खेती से आधा बीघा में चार क्विंटल बाजरा हुआ, जबकि रासायनिक तरीके से उगाए गए बाजरे की उपज तीन क्विंटल रही। इस तरह दोनों खेतों की उपज में एक क्विंटल का अंतर रहा।

घासीलाल के मुताबिक, जैविक तरीके से उगाए गए बाजरे की मांग भी आ रही है। इसके लिए 3 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक भाव मिल रहा है, जबकि सामान्य बाजार में बाजरे का भाव 2 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक रहता है। उनका कहना है कि एक बीघा में बाजरे से करीब 17 हजार रुपए तक की कमाई हुई है। अब वे जैविक तरीके से खेती करके उत्पादन और फसल की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ अच्छे भाव पाने की कोशिश कर रहे हैं।

जैविक खेती का सर्टिफिकेट लेने की तैयारी

घासीलाल अब खेती से होने वाली कमाई लगातार बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि जैविक तरीके से खेती करने पर खर्च घटने और मुनाफा बढ़ने की संभावना है। वे अमरूद, बाजरा और दूसरी फसलों में जैविक तरीके अपना रहे हैं।

अब जैविक खेती का सर्टिफिकेट लेने का भी प्रयास कर रहे हैं। ताकि अपने खेत की उपज को प्रमाणित जैविक उत्पाद के रूप में बेच सकें और बाजार में बेहतर भाव हासिल कर सकें।

Related Posts

प्रदेश के 42 निजी कृषि कॉलेजों में प्रवेश पर रोक, जेट-2026 काउंसलिंग से बाहर
  • October 29, 2026

हाईकोर्ट: 3 साल बाद भी ICAR की मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया उदयपुर। राज्य में पिछले तीन वर्षों से नियम और तय मानकों के बिना संचालित हो रहे निजी…

Read more

Continue reading
खटियाड़ी गांव में बायो-इनाकुलम का प्रदर्शन:किसानों को टिकाऊ खेती की जानकारी मिली
  • October 11, 2026

बूंदी जिले के खटियाड़ी गांव में बायो-इनाकुलम का सफल प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन आईटीसी मिशन सुनहरा कल परियोजना और सर्व मंगल ग्रामीण विकास संस्थान ने मिलकर किया। इसका मकसद…

Read more

Continue reading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

ट्रेन में यात्री का 8 हजार रुपए का सामान छूटा:लाखेरी RPF उपनिरीक्षक ने यात्री के दोस्त को सौंपा

  • October 29, 2026
ट्रेन में यात्री का 8 हजार रुपए का सामान छूटा:लाखेरी RPF उपनिरीक्षक ने यात्री के दोस्त को सौंपा

लाखेरी सीमेंट फैक्ट्री की सुनवाई फिर टली:एनजीटी में अब 22 जनवरी को होगी अगली सुनवाई

  • October 29, 2026
लाखेरी सीमेंट फैक्ट्री की सुनवाई फिर टली:एनजीटी में अब 22 जनवरी को होगी अगली सुनवाई

ब्लैकबोर्ड- ब्रेस्ट रिमूव हुआ तो आईना देखना छोड़ दिया:एयर होस्टेस थी, अब किसी औरत को देखती हूं तो पहली नजर उसके शरीर पर जाती है

  • October 29, 2026
ब्लैकबोर्ड- ब्रेस्ट रिमूव हुआ तो आईना देखना छोड़ दिया:एयर होस्टेस थी, अब किसी औरत को देखती हूं तो पहली नजर उसके शरीर पर जाती है

प्रियंका को चांद दिखाने बादलों के पार ले गए निक:विराट ने अनुष्का के लिए व्रत रखा, बॉलीवुड से राजनीति तक करवा चौथ के किस्से

  • October 29, 2026
प्रियंका को चांद दिखाने बादलों के पार ले गए निक:विराट ने अनुष्का के लिए व्रत रखा, बॉलीवुड से राजनीति तक करवा चौथ के किस्से

पेरेंटिंग- शहर में आकर बच्चा अकेला हो गया है:दादा-दादी की याद में हर वक्त उदास रहता है, उसे इस नए माहौल में कैसे ढालें

  • October 29, 2026
पेरेंटिंग- शहर में आकर बच्चा अकेला हो गया है:दादा-दादी की याद में हर वक्त उदास रहता है, उसे इस नए माहौल में कैसे ढालें

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक पब्लिक महाभियोग कार्यक्रम करेगी:राहुल गांधी बोले- 1 नवंबर के मार्च में छात्र संगठन भी आएं, लाठीचार्ज की चिंता न करें

  • October 29, 2026
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक पब्लिक महाभियोग कार्यक्रम करेगी:राहुल गांधी बोले- 1 नवंबर के मार्च में छात्र संगठन भी आएं, लाठीचार्ज की चिंता न करें