
‘हम सेक्स वर्कर बाद में, पहले इंसान हैं। हमारे वोट देने से क्या सरकार की बदनामी होगी?’
ये सवाल 36 साल की सुरैया पूछ रही हैं। राजस्थान में उनका घर है। वहीं बचपन बीता। सुरैया को 2002 में गांव के बाहर से अगवा कर लिया गया। होश आया तो खुद को दिल्ली में पाया। घर लौटने की कोशिश में जब भी भागीं, मारी-पीटी गईं। आखिरकार जीबी रोड के सेक्स वर्क में धकेल दी गईं। तब से वही उनका घर है।
सुरैया दिल्ली में दो विधानसभा और एक लोकसभा चुनाव में वोट डाल चुकी हैं, लेकिन SIR में नाम कट गया। क्योंकि उनके पास कागज नहीं, जिससे साबित कर सकें कि वो राजस्थान के उस घर में कभी रही थीं। सुरैया अकेली नहीं हैं। जीबी रोड की करीब 90% सेक्स वर्कर्स के नाम वोटर लिस्ट से कट गए हैं। इनका पोलिंग स्टेशन अजमेरी गेट नंबर-7 है। यहां पिछले साल 1,350 वोटर थे, लेकिन SIR के बाद सिर्फ 182 नाम बचे हैं।
दिल्ली ही नहीं, कोलकाता के सोनागाछी और मुंबई के कमाठीपुरा में भी सेक्स वर्कर्स के नाम वोटर लिस्ट से कटने की बात सामने आ रही है।
सबसे पहले जीबी रोड की बात… 5 जगह बेचा गया, अब कहां से लाऊं घर के कागज?
दिल्ली का पॉश इलाका सेंट्रल दिल्ली। चौड़ी सड़कें, आलीशान बंगले और महंगी गाड़ियां। इसी चमक-दमक के बीच बसा है जीबी रोड। टूटी सड़कें, जर्जर इमारतें और खिड़कियों से झांकती औरतें, जिन्हें समाज सेक्स वर्कर कहता है। यहां कोठा नंबर-58 की सीढ़ियां चढ़ते ही एक अजीब-सी गंध महसूस होती है। यहीं मिलीं मालती अपने 6 बाय 4 फीट के कमरे से निकलकर हमें सबसे ऊपर की मंजिल पर ले गईं। बोलीं, ‘ये हमारा गेस्ट हाउस है।’

जीबी रोड के कोठा नंबर- 58 की तस्वीर। यहां रह रही सेक्स वर्कर्स के नाम भी SIR में कटे हैं।
मालती बताती हैं, ‘बेटी होने के नाते घर में मां-बाप परेशान करते थे। आए दिन कमरे में बंद कर देते। इसलिए घर से भाग गई। ट्रेन में मिले एक आदमी ने काम दिलाने के बहाने मुझे पुणे में बेच दिया। दूसरी बार एक औरत को बेची गई, जिसने तीसरी बार मुझे जीबी रोड में बेच दिया। कई बार भागने के लिए छत से कूदी, लेकिन हर बार पकड़ ली गई। कभी नहीं सोचा था कि यहां काम करूंगी।’
आज मालती के पति और बेटा-बेटी सब हैं। पति का नाम वोटर लिस्ट में है, लेकिन मालती का SIR में कट गया। वे बताती हैं, ’कुछ महीने पहले एक अधिकारी कुछ कागज लेकर आए थे। बड़ी दीदी से हम सबमें बांटने के लिए बोल गए। हम ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं। इसलिए पता नहीं चला कि उसमें क्या लिखा है। हमने कुछ नहीं किया। बाद में NGO वाले ने बताया कि वोटर लिस्ट से हमारे नाम कट गए।’
हमने पूछा- दोबारा कोई नाम जोड़ने आया या आप कहीं गईं। इस पर मालती बोलीं, ’हम रोज कमाते खाते हैं। एक दिन काम ना करें तो मुश्किल हो जाती है। कागज सही कराने कहां जाएंगे? हमारे पास सिर्फ पैन और आधार कार्ड हैं। पता नहीं ये काफी भी है या नहीं। कोई आएगा तो कागज दे देंगे। कहीं जाएंगे नहीं।’

जीबी रोड में रहने वाली मालती का कहना है कि मैं अब तक वोट नहीं दे पाई, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि वोटर लिस्ट से नाम ही काट दिया जाए।
‘मां-बाप का चेहरा ही याद है, जिला भी भूल गई’
इसी कोठे पर काम करने वाली आसमा पश्चिम बंगाल की हैं। घर छोड़े बरसों बीत गए। घर किस जिले में है, याद नहीं। कहती हैं, ’अब मां-बाप के चेहरे के अलावा कुछ याद नहीं।’
SIR को लेकर आसमा कहती हैं, ’पहली बार एक अधिकारी कागज देकर चला गया। दोबारा फोटो और कुछ कागज जमा करने को बोला। कहां जाने को कहा, ये भी ठीक से याद नहीं। कागज के नाम पर आधार कार्ड और राशन कार्ड ही है। अपना पता क्या बताएं? हमारा पता तो यही है। मां-बाप दोनों गुजर गए। सिर्फ उनके चेहरे याद हैं। भाइयों से बात नहीं होती।’
आसमा कुछ पल रुकती हैं, फिर कहती हैं, ’भाई जानते हैं कि हम क्या काम करते हैं। अब गांव जाकर किस मुंह से कागज मांगें? चौथी तक पढ़ी हूं। जहां पढ़ती थी, अब वो स्कूल भी बचा है या नहीं, पता नहीं।’
वे आगे कहती हैं, ‘लोग मेरे काम को लेकर चाहे जो सोचें, एक इंसान के तौर पर हम सबके बराबर हैं। जब मैं वोट डालने के लिए कतार में खड़ी होती हूं, तो कोई मुझे बड़ा या छोटा नहीं लगता। एक बार केजरीवाल को वोट दिया था। उसने हमारे लिए बहुत कुछ किया। इस बार नाम काट दिया गया। क्या हमारे वोट में दाग है?‘

दिल्ली के जीबी रोड में रह रहीं जो सेक्स वर्कर्स वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाना चाहती है, उनके लिए डॉक्यूमेंट जुटाना मुश्किल हो गया है।
‘कई लोगों ने खुद नाम कटवाए, कागज पर जीबी रोड लिखा जाए पसंद नहीं‘
सुरैया, मालती और आसमा से मिलने के बाद संगीता से मिले। वो कोठा नंबर-58 की बड़ी बाजी (बड़ी दीदी) हैं। वोटर लिस्ट से नाम कटने पर कहती हैं, ‘इसमें अधिकारियों का कोई दोष नहीं। वो लोग आए थे। मुझसे भी मिले। कहे जिनका नाम कटा है, जुड़वा लो। कुछ के पास जरूरी कागज नहीं हैं कि उनका नाम आ सके। कई लोग दूसरी जगह रहने चले गए। यहां रहने वाले कई लोगों ने अपना नाम खुद कटवाया है।‘
वजह पूछने पर कहती हैं, ‘कुछ के बच्चे बड़े हो गए हैं। वो नहीं चाहते कि जीबी रोड का पता उनके कागज पर आए। ये बदनाम रास्ते हैं।’

संगीता के मुताबिक, सेक्स वर्कर्स के बच्चे अपने डॉक्यूमेंट्स में जीबी रोड का एड्रेस दिखाएंगे, तो उनका मजाक उड़ेगा, इसलिए वो इससे बच रहे हैं।
’फॉर्म बांटने का जिम्मा BLO का, जवाबदेही भी तय हो’
नेशनल नेटवर्क ऑफ सेक्स वर्कर्स (NNSW) की कॉर्डिनेटर किरण देशमुख बताती हैं, ‘जीबी रोड पर रहने वाली कई महिलाएं सालों से दिल्ली में हैं, लेकिन उनके पास परिवार, पुराने पते या पुरानी वोटर लिस्ट से संबंध साबित करने के लिए डॉक्यूमेंट्स नहीं हैं। अगर कोई हिचक से नाम कटवा रहा है, तो भी ये समाज की नाकामी है कि उन्हें हीनभावना से देखा गया है।‘
किरण कहती हैं, ‘कई लड़कियों की बचपन में तस्करी हुई। परिवार ने भी उनसे नाता तोड़ लिया। अब वो किस मुंह से कागज बनवाने गांव जाएं। उनके लिए SIR की शर्तें पूरी करना मुमकिन नहीं।‘
वोटर अधिकार मंच से जुड़ी रिसर्चर सागरिका राजोरा के मुताबिक, ‘SIR की प्रक्रिया उन लोगों के लिए ज्यादा मुश्किल है, जिनके पास पते या पहचान से जुड़े पक्के दस्तावेज नहीं हैं। बार-बार जगह बदलने से उन्हें ढूंढना भी मुश्किल होता है। ऐसे में BLO के लिए किसी को ढूंढने के बजाय ‘शिफ्टेड’ यानी दूसरी जगह चला गया, लिख देना आसान होता है।‘
‘BLO की जिम्मेदारी संभालने वाले कई लोग दूसरे विभाग में काम करते थे। चुनाव में अलग से उन्हें ये जिम्मेदारी मिलती है। कम समय में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नामों की जांच करना उनके लिए भी चुनौती है।‘

AERO ने कहा- हम वहां कई बार गए
जीबी रोड मटिया महल विधानसभा क्षेत्र में आता है। उसके असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अफसर प्रदीप कुमार कहते हैं, ‘सेक्स वर्कर्स की दिक्कतें जानता हूं, इसीलिए वोटिंग लिस्ट में उनका नाम जोड़ने के लिए कई कैम्प लगाए। हर कोठे पर पोस्टर लगाया गया। NGO के जरिए जागरूकता भी फैलाई।‘
‘वहां किसी BLO को अकेले नहीं भेजा। मैं उनके साथ गया। उनसे मिलकर समझाया कि कुछ बेसिक कागज ही दो, जिससे मामला आगे बढ़ा सकें। उन्होंने खुद नहीं दिए। हमने तो उनका फॉर्म तक BLO से भरवाने की बात कही, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
वे आगे कहते हैं, ‘नाम काटने की एक ये भी वजह है कि कई सेक्स वर्कर्स ने अपना पता न देकर पीछे की रिहायशी गली का दिया है। वो जीबी रोड से अपना नाम नहीं जोड़ना चाहती हैं।‘

दिल्ली के पॉश इलाके में मौजूद जीबी रोड में लाइन से जर्जर इमारते हैं। इन्हीं में 74 कोठे चल रहे हैं।
वहीं, मटिया महल से AAP विधायक मोहम्मद इकबाल का कहना कि हमने SIR को लेकर इलाके के लोगों को जागरुक किया था। जीबी रोड के बारे में पूछने पर उन्होंने ये कहते हुए फोन काट दिया कि इसके बारे में जानकारी नहीं है।
सोनागाछी में 1300 नाम कटे, कागज दिखाकर भी नहीं मिला वोट का हक
दिल्ली के जीबी रोड की तरह कोलकाता का सोनागाछी भी हजारों सेक्स वर्कर्स का ठिकाना है। ये एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया है। यहां रहने वाले करीब 4,200 लोगों में से 1,300 के नाम वोटर लिस्ट से कट गए। यहां भी ज्यादातर महिलाओं के पास पुराने घर, परिवार और पैतृक पते से जुड़े दस्तावेज नहीं हैं।
ऑल इंडिया नेटवर्क फॉर सेक्स वर्कर्स की कार्यकर्ता रिंकी सिंह बताती हैं, ‘हमने अफसरों के सामने कई महिलाओं के मुद्दे उठाए, लेकिन वे सुनने को तैयार नहीं थे। दिसंबर 2025 में सोनागाछी में कैम्प लगाए गए। कहा गया कि जिन महिलाएं के पास डॉक्यूमेंट्स और पारिवारिक रिकॉर्ड नहीं हैं, उनकी मदद की जाएगी। कैंप में 800 से ज्यादा लोग पहुंचे थे। फिर भी ज्यादातर के नाम कागज दिखाने के बाद भी नहीं जोड़े गए।‘

सोनागाछी की रहने वाली फातिमा और नूरी ने भी SIR का फॉर्म जमा किया था।
कमाठीपुरा में नाम कटने का आंकड़ा नहीं
कमाठीपुरा रेड लाइट एरिया में 5 हजार से ज्यादा सेक्स वर्कर्स रह रही हैं। यहां SIR के तहत पहली ड्राफ्ट लिस्ट 31 अगस्त को जारी हुई। फाइनल वोटर लिस्ट 16 नवंबर 2026 को प्रकाशित होनी है। हालांकि, पहली लिस्ट में कितने नाम कटे हैं, इसका आंकड़ा सामने नहीं आया है।
मुंबई सिटी जिला निर्वाचन कार्यकाल के अधिकारी ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि सेक्स वर्कर्स के लिए कोई अलग से लिस्ट नहीं जारी होती है, इसलिए अलग कोई आंकड़ा भी नहीं है। कमाठीपुरा के आस-पास कई कैम्प लगाए गए। एक भी योग्य वोटर का नाम नहीं कटा है।
कमाठीपुरा में महिलाओं और लड़कियों के साथ काम करने वाले NGO वुमन कलेक्टिव की पूनम कहती हैं, ‘हमारे यहां से किसी का नाम नहीं कटा। जिन कागजों की जरूरत थी, वो पहले बनवा लिए थे। जो लोग ट्रैफिकिंग कर आए थे, उनके भी कागज बनवाए हैं। कुछ लोगों के नाम दो जगह थे। एक वहां, जहां की वो हैं और दूसरा कमाठीपुरा। यहां उन्हीं का नाम कटा है, जिनका नाम पैतृक जगहें पर दर्ज है।’







