मेंटल हेल्थ- मम्मी-पापा बहन को ज्यादा प्यार करते थे:स्कूल में भी सब उसी को पूछते, मुझे कोई प्यार नहीं करता, क्या मैं ही बुरी हूं?

सवाल- मेरी उम्र 30 साल है। मुझे ऐसा लगता है कि जिंदगी में हर कोई मुझे टेकेन फॉर ग्रांटेड लेता है। बचपन से मुझे ऐसा महसूस होता रहा है। पेरेंट्स ने हमेशा मेरी बड़ी बहन को ज्यादा महत्व दिया, जो दिखने में मुझसे ज्यादा सुंदर थी। स्कूल में टीचर्स भी उसे ही ज्यादा प्यार करते थे। सारे रिश्तेदार भी उसी की तारीफ करते थे। मुझे हर कोई टेकेन फॉर ग्रांटेड लेता था। अब मैं बड़ी हो गई हूं, लेकिन ये कहानी अभी भी नहीं बदली। अब रिलेशनशिप में पार्टनर मुझे टेकेन फॉर ग्रांटेड लेता है। मैं उसे इतना इंपॉर्टेंस देती हूं, ख्याल रखती हूं, सब करती हूं, लेकिन बदले में मुझे उतनी इंपॉर्टेंस नहीं मिलती। क्या पूरी जिंदगी मेरे बचपन की कहानी ही दोहराई जाती रहेगी? मैं इस नरेटिव को कैसे बदलूं?

एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर।

सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि बचपन में हमें जैसा महत्व मिलता है, उसका असर आगे के रिश्तों पर भी पड़ता है। अगर बचपन में लगातार दूसरों से तुलना हुई हो और कम अहमियत मिली हो तो कई बार बड़े होने के बाद भी हम खुद को उसी नजर से देखते हैं। इससे धीरे-धीरे अपने बारे में एक धारणा बन जाती है कि-

“मैं दूसरों से कम महत्वपूर्ण हूं।”

बड़े होने पर जब रिश्ते में सामने वाला उतना अटेंशन नहीं देता, जितनी हमें उम्मीद होती है तो हम सिर्फ उस घटना को नहीं देखते। हम उसे अपनी पुरानी धारणा से जोड़ लेते हैं।

यहीं से एक ऐसा पैटर्न बनता है, जिसमें व्यक्ति दूसरों को खुश रखने के लिए जरूरत से ज्यादा कोशिश करने लगता है। अपनी जरूरतें पीछे कर देता है। इसके पीछे उम्मीद होती है कि बदले में उसे प्यार और महत्व मिलेगा। लेकिन जब ऐसा नहीं होता तो बचपन वाली वही भावना फिर मजबूत हो जाती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि आगे की पूरी जिंदगी भी इसी पैटर्न पर चलेगी।

टेकेन फॉर ग्रांटेड का संभावित पैटर्न समझिए-

क्या हर बार गलती आपकी सोच की ही है?

नहीं, यहां थोड़ा रुककर स्थिति को दो तरफ से देखना जरूरी है।

  • जब आपको लगता है कि कोई आपको टेकन फॉर ग्रांटेड ले रहा है तो सिर्फ अपनी सोच पर सवाल करना काफी नहीं है।
  • यह भी देखना होगा कि सामने वाला वास्तव में आपके साथ कैसा व्यवहार कर रहा है।

हो सकता है कि बचपन के अनुभवों की वजह से आप दूसरों के व्यवहार को जल्दी अपनी वैल्यू से जोड़ लेती हों। लेकिन दूसरी तरफ यह भी संभव है कि आपका पार्टनर सच में आपकी भावनाओं और जरूरतों को पर्याप्त महत्व नहीं दे रहा हो। इसलिए खुद को बदलने का मतलब यह नहीं है कि हर स्थिति में अपनी ही गलती मान लें। अगर सामने वाला व्यक्ति-

  • बार-बार आपकी भावनाओं को नजरअंदाज करता है।
  • आपकी सीमाओं का सम्मान नहीं करता।
  • रिश्ते में सिर्फ आप ही कोशिश कर रही हैं।

तो उसके व्यवहार को भी गंभीरता से देखना जरूरी है।

क्या आप दूसरों की स्वीकृति पर निर्भर हैं?

अब यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। पिछले दो हफ्तों को ध्यान में रखकर नीचे ग्राफिक्स में दिए सवालों के जवाब दें। हर सवाल को 0 से 3 अंक दें। जैसेकि अगर आपका जवाब ‘बिल्कुल नहीं’ है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब ‘हां’ है तो 3 नंबर दें। इससे पता चलेगा कि आप दूसरों की स्वीकृति पर निर्भर हैं या नहीं?

यह कोई डायग्नोसिस नहीं है। इसका मकसद सिर्फ यह समझना है कि क्या आपकी अपनी राय पर दूसरों की प्रतिक्रिया का असर ज्यादा हो रहा है।

सेल्फ हेल्प के टूल्स अपनाने के बाद आपको दोबारा ये सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट करना होगा। इससे आप अपनी प्रोगरेस को नोट कर पाएंगी।

इस नैरेटिव को कैसे बदलें?

सेल्फ एसेसमेंट के बाद अब सबसे जरूरी सवाल ये है कि इस नरेटिव को बदलें कैसे। जीवन को बेहतर कैसे बनाएं। इसके लिए मनोविज्ञान में इस्तेमाल होने वाली कुछ CBT यानी कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी मददगार हो सकती है। इसका मकसद अपनी सोच, भावनाओं और वास्तविक स्थिति के बीच फर्क करना सीखना है। यहां आपको चार हफ्तों का एक आसान अभ्यास दे रहे हैं। इसे लगातार करके देखें और हर हफ्ते अपने अनुभव को नोट करें।

पहला हफ्ता:

पुराने पैटर्न को पहचानें

कई बार हमें सिर्फ इतना पता होता है कि सामने वाले के व्यवहार से बुरा लगा। लेकिन अगर आप यह समझना चाहती हैं कि उस घटना ने आपको इतना प्रभावित क्यों किया तो घटना और उसके बाद मन में आई सोच को अलग-अलग देखना जरूरी है।

उदाहरण:

आपने पार्टनर के किसी जरूरी काम में उसकी मदद की और उसने इसके लिए ‘थैंक्यू’ नहीं कहा। घटना इतनी सी है। लेकिन आपके मन में तुरंत यह विचार आ गया कि “मैं उसके लिए इंपॉर्टेंट नहीं हूं।”

लेकिन हो सकता है कि सामने वाला उस समय व्यस्त रहा हो या उसने बात पर ध्यान ही न दिया हो। लेकिन अगर यही व्यवहार लगातार रिपीट हो रहा है तो इसे नजरअंदाज न करें। यहीं से अभ्यास शुरू होता है। जब भी ऐसी कोई बात आपको बहुत परेशान करे तो खुद से कुछ सवाल पूछें-

प्रोफेशनल हेल्प कब जरूरी?

वैसे तो सेल्फ हेल्प मददगार और कारगर हो सकता है, लेकिन इन स्थितियों में साइकोलॉजिस्ट की मदद लेना बेहतर है-

  • अगर यह पैटर्न रिश्तों को प्रभावित कर रहा है।
  • रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानी पैदा कर रहा है।
  • खुद के बारे में लगातार नकारात्मक सोच बनी हुई है।
  • लंबे समय तक उदासी बनी रहती है।
  • किसी काम में मन नहीं लगता है।
  • रात में नींद नहीं आती है।
  • रिश्ते में अपमान, धमकी या डर की स्थिति है।
  • खुद को नुकसान पहुंचाने या आत्महत्या के विचार आते हैं।

अंतिम बात

बचपन में बार-बार तुलना होने से किसी बच्चे के मन में यह धारणा बन सकती है कि वह दूसरों से कम है। लेकिन यह सिर्फ धारणा है, कोई अंतिम सच नहीं है। बड़े होने के बाद हमें यह सीखने का मौका मिलता है कि अपनी कीमत दूसरों की प्रतिक्रिया से अलग कैसे देखी जाए।

रिश्ते में प्यार और सम्मान दोनों तरफ से मिलना चाहिए। इसलिए आपको हर किसी को खुश करके यह साबित करने की जरूरत नहीं है कि आप महत्वपूर्ण हैं।

  • Related Posts

    मेंटल-हेल्थ- शादी के 1 साल बाद बेटी विधवा हो गई:उसके दुख में अब मैं करवा चौथ की खुशी कैसे मनाऊं, उसका दिल टूटेगा
    • October 16, 2026

    सवाल- मेरी उम्र 55 साल है और मेरी 28 साल की एक बेटी है। पिछले साल हमने बड़े धूमधाम से उसकी शादी की थी। लेकिन शादी के एक साल बाद…

    Read more

    Continue reading
    स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र:आध्यात्मिक जीवन में भाग्यवान किसे माना जाता है? 7 बातें ध्यान रखेंगे, तो जीवन सफल हो सकता है
    • October 16, 2026

    जीवन केवल जन्म से मृत्यु तक की यात्रा नहीं है, बल्कि स्वयं को जानने, समझने और अपनी छिपी हुई क्षमताओं को पहचानने की प्रक्रिया है। आध्यात्मिक जीवन का वास्तविक उद्देश्य…

    Read more

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    प्रियंका को चांद दिखाने बादलों के पार ले गए निक:विराट ने अनुष्का के लिए व्रत रखा, बॉलीवुड से राजनीति तक करवा चौथ के किस्से

    • October 29, 2026
    प्रियंका को चांद दिखाने बादलों के पार ले गए निक:विराट ने अनुष्का के लिए व्रत रखा, बॉलीवुड से राजनीति तक करवा चौथ के किस्से

    पेरेंटिंग- शहर में आकर बच्चा अकेला हो गया है:दादा-दादी की याद में हर वक्त उदास रहता है, उसे इस नए माहौल में कैसे ढालें

    • October 29, 2026
    पेरेंटिंग- शहर में आकर बच्चा अकेला हो गया है:दादा-दादी की याद में हर वक्त उदास रहता है, उसे इस नए माहौल में कैसे ढालें

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक पब्लिक महाभियोग कार्यक्रम करेगी:राहुल गांधी बोले- 1 नवंबर के मार्च में छात्र संगठन भी आएं, लाठीचार्ज की चिंता न करें

    • October 29, 2026
    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक पब्लिक महाभियोग कार्यक्रम करेगी:राहुल गांधी बोले- 1 नवंबर के मार्च में छात्र संगठन भी आएं, लाठीचार्ज की चिंता न करें

    नागपुर में जीत के बाद कांग्रेस का BJP पर पलटवार:कहा- फडणवीस ने ट्वीट डिलीट किया; MLC चुनाव पर पीएम का पोस्ट शेयर किया था

    • October 29, 2026
    नागपुर में जीत के बाद कांग्रेस का BJP पर पलटवार:कहा- फडणवीस ने ट्वीट डिलीट किया; MLC चुनाव पर पीएम का पोस्ट शेयर किया था

    करेंट अफेयर्स 29 अक्टूबर:अब 20 किमी के दायरे में आने वाले लोग सस्ता टोल पास ले सकेंगे, भारत-मैक्सिको ने ToR साइन किया

    • October 29, 2026
    करेंट अफेयर्स 29 अक्टूबर:अब 20 किमी के दायरे में आने वाले लोग सस्ता टोल पास ले सकेंगे, भारत-मैक्सिको ने ToR साइन किया

    एन. रघुरामन का कॉलम:क्या आपने अपने बच्चों को जिंदगी का सबसे अहम सबक सिखाया है?

    • October 29, 2026
    एन. रघुरामन का कॉलम:क्या आपने अपने बच्चों को जिंदगी का सबसे अहम सबक सिखाया है?