
स्टूल में ब्लड आना भी ऐसा ही एक संकेत है, जिसके पीछे बवासीर, डाइजेस्टिव सिस्टम में इंटरनल ब्लीडिंग, अल्सर, आंतों में सूजन या दूसरी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। कुछ मामलों में यह आंतों के कैंसर से भी जुड़ा हो सकता है।
चिंता की बात यह है कि शुरुआत में दिखने वाले इस लक्षण को नजरअंदाज करने से बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। वहीं समय पर ध्यान देकर भविष्य की बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है।
इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में हम स्टूल में ब्लड आने की समस्या पर विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं?
- स्टूल में ब्लड दिखाई दे तो क्या करें?
एक्सपर्ट- डॉ. रामराज वी. एन., सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, स्पर्श हॉस्पिटल, बेंगलुरु
सवाल- स्टूल में ब्लड आने का क्या मतलब है?
जवाब- इसका मतलब है कि पाचन तंत्र के किसी हिस्से में ब्लीडिंग हो रही है। इसे ऐसे समझिए-
- चमकीला रेड ब्लड आमतौर पर एनस (गुदा), रेक्टम (मलाशय) या बड़ी आंत के निचले हिस्से से ब्लीडिंग का संकेत है।
- डार्क रेड या मैरून कलर का ब्लड बड़ी आंत या छोटी आंत से ब्लीडिंग का संकेत है।
- वहीं, काला और तारकोल जैसा स्टूल पेट में ब्लीडिंग की ओर इशारा करता है।
सवाल- स्टूल में ब्लड आने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?
जवाब- इसके कई कारण हो सकते हैं। इनमें बवासीर से लेकर आंतों की सूजन और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां शामिल हैं। कुछ दवाओं के कारण भी ब्लीडिंग हो सकती है। सभी संभावित कारण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या ऐसा भी हो सकता है कि ब्लड आंखों से दिखाई न दे, लेकिन स्टूल में मौजूद हो?
जवाब- हां, ऐसा हो सकता है। इसे ‘ऑकल्ट ब्लड’ कहते हैं। इसमें स्टूल में ब्लड की मात्रा इतनी कम होती है कि वह आंखों से दिखाई नहीं देती। इसका पता स्टूल टेस्ट से लगाया जा सकता है।
हालांकि, स्टूल में ऑकल्ट ब्लड मिलने का मतलब किसी बीमारी की पुष्टि होना नहीं है। इसके पीछे बवासीर, आंतों में सूजन, पॉलीप्स या पाचन तंत्र में ब्लीडिंग जैसी कई वजहें हो सकती हैं।
सवाल- फिर कैसे पता चलता है कि स्टूल में ब्लड है?
जवाब- इसके लिए फीकल ऑकल्ट ब्लड टेस्ट (FOBT) किया जाता है। इसमें स्टूल के सैंपल की जांच करके उसमें मौजूद ब्लड का पता लगाया जाता है, भले ही वह आंखों से दिखाई न दे।
सवाल- डॉक्टर कब ये टेस्ट करवाने के लिए कहते हैं?
जवाब- डॉक्टर इन स्थितियों में ये टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं-
- पाचन तंत्र में अंदरूनी ब्लीडिंग की आशंका होने पर।
- लगातार कमजोरी या एनीमिया (खून की कमी) होने पर, जब ब्लीडिंग की आशंका हो।
- कोलोरेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए, भले ही कोई लक्षण न हों।
सवाल- क्या बिना दर्द के भी स्टूल में ब्लड आ सकता है?
जवाब- हां, बिना दर्द के भी स्टूल में ब्लड आ सकता है। बवासीर, आंतों में पॉलीप्स या कोलोरेक्टल कैंसर जैसी कंडीशंस में ब्लीडिंग बिना दर्द के हो सकती है। इसलिए दर्द न होने पर भी स्टूल में ब्लड दिखे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
सवाल- स्टूल में ब्लड दिखाई दे तो क्या करना चाहिए?
जवाब- इसे नजरअंदाज न करें। बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें। ब्लड के रंग, मात्रा और साथ में दिखने वाले दूसरे लक्षणों पर ध्यान दें। डॉक्टर जरूरत के अनुसार स्टूल टेस्ट, ब्लड टेस्ट या अन्य जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
सवाल- स्टूल में ब्लड आने पर कब तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
जवाब- स्टूल में एक बूंद भी ब्लड दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। खासतौर पर इन स्थितियों में तुरंत मेडिकल हेल्प लें-

सवाल- स्टूल में ब्लड आने पर संभावित बीमारी का पता लगाने के लिए डॉक्टर कौन-से टेस्ट करते हैं?
जवाब- डॉक्टर मरीज की पूपिंग हैबिट्स, दूसरे लक्षणों और हेल्थ कंडीशंस के बारे में पूछते हैं। इसके बाद जरूरत के अनुसार ये जांच करा सकते हैं-
डिजिटल रेक्टल एग्जाम: एनस और रेक्टम की जांच के लिए।
एनोस्कोपी/प्रोक्टोस्कोपी: एनस और रेक्टम के निचले हिस्से की जांच के लिए।
फ्लेक्सिबल सिग्मोइडोस्कोपी: बड़ी आंत के निचले हिस्से की अंदरूनी जांच के लिए।
स्टूल टेस्ट: स्टूल में छिपे ब्लड का पता लगाने के लिए।
कोलोनोस्कोपी: पूरी बड़ी आंत की जांच के लिए।
अपर एंडोस्कोपी: पेट या छोटी आंत के शुरुआती हिस्से में ब्लीडिंग की आशंका होने पर।
सवाल- पेट से संबंधित इन बीमारियों के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?
जवाब- इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसेकि-
- असंतुलित खान-पान
- कम फाइबर वाली डाइट
- पर्याप्त पानी न पीना
- फिजिकल एक्टिविटी में कमी
- लंबे समय तक कब्ज रहना
- अनहेल्दी लाइफस्टाइल
हालांकि, कुछ बीमारियां संक्रमण, आनुवंशिक कारणों या इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी के कारण भी हो सकती हैं।

सवाल- लाइफस्टाइल इन बीमारियों के लिए कैसे जिम्मेदार है?
जवाब- खराब लाइफस्टाइल कई तरह से पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकती है, जैसेकि-
- कम फाइबर वाली डाइट से कब्ज की समस्या बढ़ सकती है।
- पानी कम पीने से स्टूल सख्त हो सकता है और शौच में परेशानी हो सकती है।
- फिजिकल एक्टिविटी की कमी से पाचन स्लो हो जाता है और कब्ज की समस्या हो सकती है।
- टॉयलेट की इच्छा रोकने से कब्ज और एनल फिशर का जोखिम बढ़ता है।
- लंबे समय तक टॉयलेट में बैठने और ज्यादा जोर लगाने से बवासीर का रिस्क बढ़ता है।
सवाल- हेल्दी पूपिंग के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करें?
जवाब- इसके लिए खानपान और रोजमर्रा की आदतों में कुछ बदलाव करना जरूरी है। कौन-से बदलाव इसमें मददगार हो सकते हैं, ग्राफिक में देखिए-

कुल मिलाकर, स्टूल में ब्लड आना पाचन तंत्र में चल रही किसी अंदरूनी समस्या का संकेत है। इसलिए इसे मामूली समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर डॉक्टर से जांच कराएं, ताकि ब्लीडिंग की सही वजह का पता चल सके और जरूरत के मुताबिक इलाज शुरू किया जा सके।









