
राजस्थान के कई जिलों में सूखे जैसे हालात हैं, लेकिन बूंदी के जंगल अलग तस्वीर दिखा रहे हैं। रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के घने जंगलों में अक्टूबर में भी पहाड़ी झरनों की आवाज गूंज रही है।
पर्यावरणविद पृथ्वी सिंह राजावत ने बताया कि टाइगर रिजर्व के कालदां बफर जोन में सबसे ज्यादा झरने हैं। यहां 8 किलोमीटर लंबे पहाड़ी नाले में आधा दर्जन से ज्यादा प्राकृतिक झरने बह रहे हैं। इनमें 100 फीट ऊंचा भूकी जलप्रपात प्रमुख है। छोटा डबका, बड़ा डबका, मंझला डबका, सगस जी का दह और देवनारायण की कुई जैसे जलस्रोत भी शामिल हैं।
राजावत के मुताबिक, ये झरने जंगल के पेड़-पौधों को नमी दे रहे हैं और वन्यजीवों के लिए पानी का स्रोत बने हुए हैं। बाघ, तेंदुए और भालू जैसे जानवरों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ रहा। सितंबर के बाद झरने सूख जाते हैं, पर बूंदी में घने जंगल और जल संचय से अक्टूबर में भी ये जीवंत हैं। ये पर्यावरण संतुलन व इको-टूरिज्म की संभावना बढ़ा रहे हैं।








